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यहां सरकार खुद युवाओं से कर रही शराब पीने की अपील, जानिए क्यों जारी किया ऐसा अजीब फरमान?

यहां सरकार खुद युवाओं से कर रही शराब पीने की अपील, जानिए क्यों जारी किया ऐसा अजीब फरमान?

आमतौर पर दुनियाभर में शराब के सेवन को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है कि वे सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करें या इससे दूर रहें। कई देश स्वास्थ्य संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से शराब से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को सचेत करते हैं। लेकिन जापान से सामने आई एक खबर ने सभी को हैरान कर दिया है, जहां कथित तौर पर सरकार की आय में कमी के चलते युवाओं से शराब के सेवन को बढ़ाने की अपील की जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान में हाल के वर्षों में शराब की खपत में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। खासकर युवाओं में शराब पीने की आदत पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। इसका सीधा असर सरकार के राजस्व पर पड़ रहा है, क्योंकि शराब और तेल उत्पादों पर लगने वाला कर (tax) देश की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

आंकड़ों के मुताबिक, जापान में “साके टैक्स” और अन्य अल्कोहलिक पेय पदार्थों पर मिलने वाला राजस्व पिछले कुछ वर्षों में घटा है, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ा है। इसी स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों और इंडस्ट्री से जुड़े कुछ अभियानों के माध्यम से लोगों, खासकर युवाओं को सामाजिक कार्यक्रमों और लाइफस्टाइल में शराब की खपत को बढ़ाने के लिए प्रेरित करने जैसी चर्चा सामने आई है।

हालांकि, इस पूरे मामले ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य राजस्व बढ़ाना हो सकता है, लेकिन युवाओं को शराब सेवन के लिए प्रेरित करना स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से विवादास्पद और जोखिम भरा कदम माना जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर, कुछ आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जापान जैसे विकसित देशों में आबादी के वृद्ध होने और युवा जनसंख्या में बदलाव के कारण पारंपरिक उपभोग पैटर्न बदल रहे हैं। इसका असर केवल शराब ही नहीं, बल्कि कई अन्य सेक्टर्स पर भी पड़ रहा है।

सरकारी अधिकारियों की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि शराब का सेवन व्यक्तिगत निर्णय का विषय है और किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या अनिवार्य नीति लागू नहीं की गई है। लेकिन उद्योग से जुड़े कुछ समूहों द्वारा बाजार को पुनर्जीवित करने के लिए प्रचार अभियानों की बात सामने आई है।

इस पूरे मुद्दे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि किसी भी देश की आर्थिक जरूरतें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जनस्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

फिलहाल जापान में यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है—एक तरफ आर्थिक चुनौतियाँ, तो दूसरी तरफ सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ। यह मामला दिखाता है कि कैसे बदलते उपभोग पैटर्न किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।

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