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यहां शादीशुदा महिलाएं पराए मर्दों के साथ बनाती हैं संबंध, अनोखी है इसके पीछे की वजह

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हर देश की अपनी एक अनोखी सांस्कृतिक विरासत और परंपराएं होती हैं, जिनमें कई बार ऐसी मान्यताएं जुड़ी होती हैं जो बाहरी दुनिया को हैरान कर देती हैं। आज हम आपको एक ऐसी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने आप में बेहद अजीब, विवादित और रहस्यमय है। यह परंपरा इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित माउंट केमुकस (Mount Kemukus) से जुड़ी है, जहां हर साल आयोजित होने वाला पॉन फेस्टिवल दुनियाभर में चर्चा का विषय बन चुका है।

क्या है पॉन फेस्टिवल?

पॉन फेस्टिवल इंडोनेशिया के बाली और जावा द्वीपों के कुछ खास क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक धार्मिक और पारंपरिक उत्सव है। इस उत्सव की सबसे अजीब बात यह है कि शादीशुदा महिलाएं अपने पतियों की जानकारी में होते हुए भी अजनबी पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाती हैं

यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसमें शामिल महिलाएं मानती हैं कि ऐसा करने से उनकी मुरादें पूरी होती हैं, जीवन में समृद्धि आती है और दुर्भाग्य दूर होता है।

क्यों बनती हैं महिलाएं पराए मर्दों के साथ संबंध?

इस परंपरा के पीछे एक मान्यता है कि जो महिलाएं इस पर्वत पर आकर किसी अंजान पुरुष के साथ सात बार संबंध बनाती हैं, उनकी हर इच्छा पूरी होती है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि हर बार संबंध उसी व्यक्ति के साथ ही बनाना होता है जिससे पहली बार संबंध बना था।

यह सात चरणों की प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें हर चरण के बाद 35 दिनों का अंतर होता है। इस अंतराल के बाद पर्वत पर दोबारा आकर वही प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है।

16वीं सदी से चली आ रही परंपरा

इस परंपरा की शुरुआत 16वीं शताब्दी में मानी जाती है। कथा के अनुसार, पैंगेरन समोद्रो नामक एक राजा थे जो अपनी सौतेली मां नायी ओंत्रोवुलान के प्रति आकर्षित हो गए थे। दोनों ने शारीरिक संबंध बनाए लेकिन उसी दौरान दोनों की हत्या कर दी गई। ऐसा माना जाता है कि वे अपनी "इच्छा" पूरी नहीं कर सके थे, इसलिए आज जो भी जोड़ा वहां जाकर यह क्रिया पूरी करता है, उसे समोद्रो और ओंत्रोवुलान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

धार्मिक प्रक्रिया भी है शामिल

माउंट केमुकस पर्वत पर पहुंचने के बाद श्रद्धालु पहले पैंगेरन समोद्रो और नायी ओंत्रोवुलान की समाधि पर फूल चढ़ाते हैं। इसके बाद पर्वत पर बने एक पवित्र कुंड में स्नान करते हैं और फिर अपने चुने हुए साथी के साथ संबंध बनाते हैं।

यह पूरी प्रक्रिया एक धार्मिक अनुष्ठान की तरह मानी जाती है और स्थानीय लोग इसे पवित्र परंपरा के रूप में देखते हैं।

पाप और पुण्य की उलझन

इस परंपरा को लेकर एक और मान्यता है जो थोड़ा विरोधाभास उत्पन्न करती है। कहा जाता है कि समोद्रो और ओंत्रोवुलान ने मां-बेटे जैसे रिश्ते में होते हुए भी पाप किया। इसलिए जो भी व्यक्ति आज इस पर्वत पर जाकर ऐसा पाप करता है, उसे दोनों का आशीर्वाद मिलता है क्योंकि वो उनके अधूरे कर्म को पूरा कर रहा होता है।

यह विचारधारा पश्चिमी या आधुनिक समाज के लिए अस्वीकार्य और अजीब हो सकती है, लेकिन स्थानीय समुदाय के लिए यह श्रद्धा और विश्वास की बात है।

क्या पतियों को इस परंपरा की जानकारी होती है?

हां, यहां की महिलाओं के पति इस परंपरा के बारे में जानते हैं और कई बार खुद अपनी पत्नियों को इस उत्सव में भाग लेने के लिए भेजते हैं। इसका कारण यह है कि उन्हें विश्वास होता है कि इससे परिवार में खुशहाली, धन, संतान और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का समाधान होता है।

हालांकि, बदलते समय के साथ युवा पीढ़ी इस परंपरा पर सवाल उठाने लगी है और कई सामाजिक संगठनों ने इसे नैतिक और सामाजिक दृष्टि से अनुचित भी बताया है।

सामाजिक आलोचना और बदलाव की कोशिशें

हाल के वर्षों में पॉन फेस्टिवल की परंपरा को लेकर काफी विवाद हुआ है। स्वास्थ्य विभाग, महिला अधिकार संगठन और धार्मिक नेताओं ने इसे कुप्रथा बताया है और लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है।

फिर भी, हर साल बड़ी संख्या में लोग इस पर्वत पर आते हैं, जिससे यह परंपरा आज भी जीवित है और स्थानीय आस्था का केंद्र बनी हुई है।

निष्कर्ष: परंपरा या अंधविश्वास?

इंडोनेशिया का यह उत्सव बताता है कि हर संस्कृति में कुछ ऐसी परंपराएं होती हैं जो बाहर से देखने पर असामान्य, अजीब या अविश्वसनीय लगती हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए वह विश्वास, आस्था और इतिहास से जुड़ी होती हैं।

सवाल यह है कि क्या इस तरह की परंपराओं को समय के साथ बदलना चाहिए या उन्हें सांस्कृतिक विरासत मानकर स्वीकार करना चाहिए? यह फैसला आने वाली पीढ़ियों को करना होगा, लेकिन आज के दौर में यह चर्चा जरूर करता है कि परंपराएं किस हद तक व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक मूल्यों पर प्रभाव डालती हैं।

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