24 घंटे में तेजी से चलते दिखा हरेराम यादव, पैर टूटने के दावे पर उठे सवाल, जमुई पुलिस ने भ्रामक खबरों का किया खंडन
बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ और बदसलूकी के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने कई सवाल खड़े कर दिए। एक वीडियो में आरोपी हरेराम यादव को अस्पताल ले जाते समय सहारे के साथ चलते देखा गया, जबकि करीब 24 घंटे बाद सामने आए दूसरे वीडियो में वही व्यक्ति सामान्य तरीके से चलता नजर आया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उसके पैर टूटने और पुलिस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह के दावे किए जाने लगे।
हालांकि, जमुई पुलिस ने वायरल दावों को भ्रामक बताया है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग आरोपियों को एक ही व्यक्ति समझ लिया गया। पैर में गोली लगने वाला आरोपी हरेराम यादव नहीं, बल्कि इसी मामले का मुख्य आरोपी नंदन यादव है। नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी थी और वह अस्पताल में इलाजरत है।
वहीं, हरेराम यादव को पुलिस ने भागने के दौरान पकड़ लिया था। उपलब्ध रिपोर्टों और पुलिस के स्पष्टीकरण के मुताबिक, भागते समय गिरने से उसके पैर में चोट आई थी। उसे इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल ले जाया गया। बाद में अदालत में पेशी के दौरान वह बिना किसी सहारे के चलता दिखाई दिया। इसी वीडियो को सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर किया गया कि पैर टूटने के बावजूद आरोपी महज 24 घंटे में सामान्य रूप से चलने लगा।
इस मामले में भ्रम इसलिए भी बढ़ा क्योंकि शुरुआती रिपोर्टों में हरेराम यादव को लेकर पैर टूटने की बात सामने आई थी। बाद में सामने आए वीडियो में उसके सामान्य तरीके से चलने के कारण सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। कुछ पोस्ट में यह दावा भी किया गया कि जिस आरोपी को पुलिस मुठभेड़ में पैर में गोली लगी थी, वही अगले दिन सामान्य रूप से चलता दिखाई दे रहा है।
जमुई पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह दावा सही नहीं है। पुलिस के मुताबिक नंदन यादव और हरेराम यादव दो अलग-अलग आरोपी हैं। नंदन को पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगी, जबकि हरेराम को पकड़ने के दौरान पैर में चोट आई थी। दोनों की पहचान अलग-अलग होने के बावजूद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कारण भ्रम पैदा हुआ।
फैक्ट-चेक रिपोर्टों में भी वायरल वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति की पहचान हरेराम यादव के रूप में की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वह आरोपी नहीं है जिसे पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी थी। इसलिए वीडियो को नंदन यादव के एनकाउंटर से जोड़कर पुलिस पर फर्जी कार्रवाई का आरोप लगाने वाला दावा भ्रामक बताया गया है।
इस पूरे मामले के बाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और दावों की पुष्टि किए बिना उन्हें शेयर करने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने लोगों से भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा नहीं करने की अपील की है। मामले में दोनों आरोपियों की भूमिका और पुलिस कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है।

