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बकरी के दूध में है चमत्कार! गाय के दूध से अलग कई फायदे, इंसानी दूध से तुलना कितनी सही?

बकरी के दूध में है चमत्कार! गाय के दूध से अलग कई फायदे, इंसानी दूध से तुलना कितनी सही?

बकरी का दूध लंबे समय से कई देशों में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे लेकर अक्सर दावा किया जाता है कि बकरी का दूध गाय के दूध से ज्यादा फायदेमंद है और इसके गुण इंसानी ब्रेस्ट मिल्क से भी मिलते-जुलते हैं। हालांकि, इन दावों को समझने के लिए वैज्ञानिक तथ्यों और पोषण संबंधी अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

बकरी के दूध में प्रोटीन, वसा, कैल्शियम, फॉस्फोरस और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी प्रोटीन संरचना और फैट ग्लोब्यूल्स की विशेषताओं के कारण कुछ लोगों को इसे पचाना गाय के दूध की तुलना में आसान लग सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है और इसे सभी लोगों के लिए आसानी से पचने वाला दूध नहीं माना जा सकता।

बकरी के दूध की एक खास बात इसमें मौजूद प्रोटीन की संरचना है। इसमें मुख्य रूप से कैसिइन प्रोटीन पाया जाता है और कुछ लोगों में यह गाय के दूध की तुलना में अलग पाचन प्रतिक्रिया दे सकता है। इसके अलावा, बकरी के दूध में कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है, जो हड्डियों और दांतों के लिए महत्वपूर्ण खनिज है।

कई बार सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाता है कि बकरी के दूध में इंसानी ब्रेस्ट मिल्क जैसे गुण होते हैं। दोनों में कुछ पोषक तत्व जरूर पाए जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बकरी का दूध मां के दूध का विकल्प है। इंसानी ब्रेस्ट मिल्क शिशु की जरूरतों के अनुसार विशेष रूप से बना होता है और इसमें एंटीबॉडी तथा अन्य जैव सक्रिय घटक होते हैं, जो सामान्य पशु दूध में उसी तरह मौजूद नहीं होते।

बच्चों के मामले में विशेष सावधानी जरूरी है। एक साल से कम उम्र के शिशुओं के लिए सामान्य बकरी का दूध मां के दूध या डॉक्टर द्वारा सुझाए गए इन्फेंट फॉर्मूला का विकल्प नहीं माना जाता। छोटे बच्चों को बकरी का दूध देने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

वहीं, जिन वयस्कों को गाय के दूध से परेशानी होती है, वे डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेकर बकरी के दूध को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। लेकिन यह मान लेना सही नहीं होगा कि बकरी का दूध हर व्यक्ति के लिए गाय के दूध से बेहतर है।

कुल मिलाकर बकरी का दूध पोषक आहार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे 'चमत्कारी' या मां के दूध के बराबर बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। इसके फायदे व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, आहार और दूध के प्रति सहनशीलता पर निर्भर करते हैं।

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