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जर्मनी में 4:58 बजते ही खाली हुआ ऑफिस, वीडियो ने खींचा लोगों का ध्यान

जर्मनी में 4:58 बजते ही खाली हुआ ऑफिस, वीडियो ने खींचा लोगों का ध्यान

क्या आपने कभी ऐसा ऑफिस देखा है, जहां काम खत्म होने के समय से कुछ मिनट पहले ही लगभग पूरा फ्लोर खाली हो जाए? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इन दिनों भारत और जर्मनी के वर्क कल्चर के अंतर को लेकर खूब चर्चा बटोर रहा है। दरअसल, भारतीय प्रोफेशनल मोहित ने जर्मनी स्थित अपने ऑफिस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। वीडियो में वह सोमवार की शाम करीब 4:58 बजे अपने ऑफिस का माहौल दिखाते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि इस समय तक ऑफिस का लगभग पूरा फ्लोर खाली दिखाई देता है।

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4:58 बजे दिखाया ऑफिस का नजारा

वायरल वीडियो की शुरुआत मोहित अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर समय दिखाकर करते हैं। स्क्रीन पर 16:58 यानी शाम 4:58 बजे का समय नजर आता है। इसके बाद वह कैमरा घुमाकर ऑफिस का पूरा फ्लोर दिखाते हैं।

कैमरा घूमते ही ज्यादातर डेस्क और कुर्सियां खाली नजर आती हैं। कुछ कर्मचारी दिखाई देते हैं, लेकिन अधिकांश लोग अपना काम खत्म करके ऑफिस से जा चुके होते हैं। मोहित इसी के जरिए भारत और जर्मनी के काम करने के तरीके में अंतर दिखाने की कोशिश करते हैं।

काम के बाद निजी जिंदगी को प्राथमिकता

वीडियो के साथ मोहित ने वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर अपनी बात भी रखी। उनका कहना है कि नौकरी जिंदगी का अहम हिस्सा जरूर है, लेकिन पूरी जिंदगी सिर्फ काम के इर्द-गिर्द नहीं होनी चाहिए।

जर्मनी के इस ऑफिस का वीडियो दिखाता है कि निर्धारित काम के घंटे पूरे होने के बाद कर्मचारी अपने निजी समय को भी महत्व देते हैं। समय पर ऑफिस से निकलकर लोग परिवार, दोस्तों, आराम और दूसरी निजी गतिविधियों के लिए समय निकाल सकते हैं।

भारत के वर्क कल्चर पर भी चर्चा

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारत और जर्मनी के वर्क कल्चर को लेकर बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स ने भारतीय ऑफिसों में लंबे समय तक काम करने और ऑफिस टाइम के बाद भी कर्मचारियों के रुकने की संस्कृति पर सवाल उठाए।

कुछ लोगों का कहना है कि कई भारतीय कंपनियों में देर तक ऑफिस में रुकने को मेहनत और समर्पण से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि हर कंपनी और हर सेक्टर का काम करने का तरीका अलग होता है, इसलिए दोनों देशों के वर्क कल्चर की सीधी तुलना हमेशा सही नहीं हो सकती।

फिर भी मोहित का यह वीडियो एक अहम सवाल जरूर उठाता है—क्या ज्यादा घंटे ऑफिस में बिताना ही बेहतर काम करने की निशानी है, या फिर काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन भी उतना ही जरूरी है?

वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है और इसी बहाने एक बार फिर वर्क-लाइफ बैलेंस और ऑफिस कल्चर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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