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नेपाल की बाढ़ के बीच चर्चा में आया गंडक बैराज, भारत के मैदानी इलाकों की सुरक्षा में कितना अहम है यह प्रोजेक्ट?
 

नेपाल की बाढ़ के बीच चर्चा में आया गंडक बैराज, भारत के मैदानी इलाकों की सुरक्षा में कितना अहम है यह प्रोजेक्ट?

नई दिल्ली: नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के बीच बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक नदी का जलस्तर एक बार फिर चर्चा में है। ऐसे समय में भारत-नेपाल के बीच हुए गंडक समझौते और गंडक बैराज की भूमिका को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट सामने आ रही हैं। इन्हीं पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के दूरदर्शी फैसलों का भी जिक्र किया जा रहा है।

भारत और नेपाल के बीच 1959 में गंडक नदी के पानी के इस्तेमाल और उससे जुड़े प्रोजेक्ट को लेकर समझौता हुआ था। इसके बाद गंडक बैराज का निर्माण किया गया, जिसे दोनों देशों के बीच जल संसाधन सहयोग की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता है।

नेपाल की बारिश का असर बिहार-यूपी तक

गंडक नदी नेपाल से निकलकर भारत में प्रवेश करती है और बिहार तथा उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से होकर गुजरती है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे भारत के मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा पैदा होता है।

ऐसे में गंडक बैराज पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने और सिंचाई व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बाढ़ के समय इसके संचालन और जल प्रबंधन पर अधिकारियों की नजर रहती है।

1959 का गंडक समझौता क्यों था अहम?


भारत और नेपाल के बीच गंडक परियोजना को लेकर हुए समझौते का उद्देश्य नदी के पानी का उपयोग सिंचाई और अन्य विकास कार्यों के लिए करना था। इस समझौते के तहत गंडक नदी पर बैराज और नहर प्रणाली विकसित करने की योजना आगे बढ़ी।

परियोजना ने बिहार और उत्तर प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही नेपाल के कुछ क्षेत्रों को भी सिंचाई और संबंधित जल संसाधन सुविधाओं का लाभ मिला।

नेहरू के दौर में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट

गंडक परियोजना का विकास तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुआ। इसी वजह से आज सोशल मीडिया पर गंडक बैराज को नेहरू की विकास संबंधी सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, यह कहना कि केवल बैराज की वजह से बिहार और उत्तर प्रदेश को हर बड़ी बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षा मिल सकती है, अतिशयोक्ति होगी। बाढ़ का प्रभाव बारिश की मात्रा, नदी के प्रवाह, तटबंधों की स्थिति, स्थानीय जल निकासी और बैराज संचालन सहित कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

बाढ़ नियंत्रण के साथ सिंचाई में भी भूमिका

गंडक बैराज का महत्व केवल बाढ़ प्रबंधन तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ी नहर प्रणाली के जरिए कृषि क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया जाता है, जिससे बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में सिंचाई व्यवस्था को फायदा मिला है।

इस लिहाज से गंडक परियोजना भारत-नेपाल के बीच सीमा पार जल संसाधन सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

आज भी क्यों याद आता है यह समझौता?

नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बनने पर गंडक नदी का जलस्तर भारत के लिए भी चिंता का विषय बन जाता है। ऐसे समय में दशकों पुराने भारत-नेपाल जल समझौतों और उनसे जुड़ी परियोजनाओं की भूमिका फिर चर्चा में आती है।

गंडक बैराज इस बात का उदाहरण है कि सीमा पार बहने वाली नदियों के प्रबंधन के लिए पड़ोसी देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। आज बदलते मौसम और बढ़ती चरम मौसमी घटनाओं के दौर में ऐसे जल संसाधन समझौतों की उपयोगिता और बेहतर आपदा प्रबंधन की जरूरत पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

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