भारत के लिए 4 गोल्ड मेडल जीतने से लेकर सब्जी बेचने तक, झारखंड के इस एथलीट के Video ने लोगों को किया इमोशनल
सोशल मीडिया पर इन दिनों झारखंड के एक एथलीट की कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है। तस्वीरों और वीडियो में एक तरफ जहां उनकी दीवार पर चमकते हुए गोल्ड मेडल नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वह सड़क किनारे बैठकर सब्जियां बेचते दिखाई दे रहे हैं। यह कहानी है झारखंड के थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार की, जिन्होंने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4 गोल्ड मेडल जीते हैं।
रांची के रहने वाले 29 वर्षीय अमरदीप कुमार ने थ्रोबॉल में देश का प्रतिनिधित्व किया और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को गौरवान्वित किया। उन्होंने साल 2015 में मलेशिया में आयोजित एशियन जूनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद भी उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक हासिल किए।
लेकिन अब उनकी जिंदगी की तस्वीर कुछ अलग है। वायरल वीडियो में अमरदीप रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचते नजर आ रहे हैं। वीडियो की सबसे भावुक करने वाली बात यह है कि जिस जगह वह ग्राहकों को सब्जियां तौल रहे हैं, वहीं पीछे उनकी उपलब्धियों के गोल्ड मेडल भी टंगे हुए दिखाई देते हैं। यह तस्वीर लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है।
अमरदीप ने बताया कि खेल में सफलता हासिल करने के बावजूद उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए वह सब्जी बेचने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर कैब भी चलाते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सरकारी नौकरी और प्रोत्साहन राशि के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी मदद नहीं मिल सकी।
विदेश जाकर देश के लिए जीता मेडल, खुद उठाया खर्च
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमरदीप को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए कई बार आर्थिक संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने बताया कि मलेशिया में प्रतियोगिता में जाने के लिए भी उन्हें कर्ज लेना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खेल के मैदान में देश का नाम रोशन किया।
अमरदीप की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने खिलाड़ियों की स्थिति को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। यूजर्स का कहना है कि जो खिलाड़ी देश के लिए मेडल जीतते हैं, उन्हें खेल के बाद भी सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए। कई लोगों ने सरकार से ऐसे खिलाड़ियों की मदद करने की अपील की।
इस मामले पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी संज्ञान लिया है और खेल विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से खिलाड़ी की मदद और रोजगार के विकल्पों पर विचार करने की बात सामने आई है।
अमरदीप की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भविष्य में आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन देने के लिए व्यवस्था कितनी मजबूत है। उनकी मेहनत और जज्बा आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

