ChatGPT से IPL टिकट बनाकर ठगी, फर्जी बुकिंग के नाम पर लोगों से लाखों की वसूली का मामला सामने आया
एक चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसमें ChatGPT जैसे AI टूल का इस्तेमाल कर फर्जी IPL टिकट और बुकिंग तैयार कर लोगों से ठगी करने का आरोप लगाया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगों ने तकनीक का दुरुपयोग करते हुए नकली टिकट, बुकिंग कन्फर्मेशन और भुगतान रसीदें तैयार कीं, जिनके जरिए क्रिकेट प्रेमियों को झांसे में लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सक्रिय था, जहां लोगों को IPL मैचों के टिकट कम कीमत या “सीक्रेट ऑफर” के नाम पर बेचे जाने का दावा किया जाता था। ठग पहले ग्राहकों से संपर्क करते थे और फिर उन्हें आकर्षक ऑफर दिखाकर भुगतान के लिए राजी करते थे। भुगतान होने के बाद उन्हें AI से बनाए गए फर्जी टिकट और QR कोड भेज दिए जाते थे, जो स्टेडियम में स्कैन नहीं होते थे।
पीड़ितों ने बताया कि उन्हें टिकट पूरी तरह असली लगते थे क्योंकि दस्तावेज़ों में टीम का नाम, सीट नंबर, बारकोड और बुकिंग डिटेल्स तक शामिल होती थीं। इसी कारण कई लोग आसानी से धोखे का शिकार हो गए। जब वे स्टेडियम पहुंचे तो उन्हें प्रवेश नहीं मिला, जिसके बाद ठगी का खुलासा हुआ।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि फर्जी दस्तावेज़ों को बनाने के लिए AI टूल्स और एडिटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें ChatGPT का सीधे तौर पर दुरुपयोग कैसे किया गया, लेकिन टेक्नोलॉजी आधारित फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं।
एक साइबर क्राइम अधिकारी के अनुसार, “यह मामला दिखाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल कर अपराधी लोगों को गुमराह कर रहे हैं। AI टूल्स से नकली लेकिन बेहद वास्तविक दिखने वाले दस्तावेज़ बनाना आसान हो गया है, जिससे आम लोग धोखे में आ जाते हैं।”
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि IPL या किसी भी बड़े इवेंट के टिकट केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही खरीदें। सोशल मीडिया या अनजान लिंक से टिकट खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।
इसके अलावा, विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में डिजिटल जागरूकता बेहद जरूरी है, क्योंकि फर्जी वेबसाइट और AI-जनरेटेड कंटेंट असली और नकली के बीच अंतर करना मुश्किल बना देते हैं।
फिलहाल पुलिस इस गिरोह के नेटवर्क, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस साइबर फ्रॉड से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला एक बार फिर यह चेतावनी देता है कि तकनीक जितनी उपयोगी है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है अगर इसका गलत इस्तेमाल किया जाए।

