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चिकन-मटन भूल जाइए! यहां धड़ल्ले से बिक रहे हैं ‘कोबरा के पकौड़े और समोसे’; वायरल हुआ ये वीडियो

चिकन-मटन भूल जाइए! यहां धड़ल्ले से बिक रहे हैं ‘कोबरा के पकौड़े और समोसे’; वायरल हुआ ये वीडियो

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक हैरान कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स सांप के मांस से बने पकौड़े और समोसे बेचने का दावा करता दिखाई दे रहा है। वीडियो में दुकान पर रखे खाद्य पदार्थों को देखकर लोग हैरान हैं। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे देखकर सवाल उठाया कि आखिर कोई सांप के मांस से बने व्यंजन कैसे और कहां बेच सकता है।

वायरल वीडियो में क्या दिखा?

वीडियो में एक कथित स्ट्रीट फूड विक्रेता अलग-अलग तरह के पकौड़े और समोसे दिखाता नजर आता है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि इनमें कोबरा के मांस का इस्तेमाल किया गया है।

विक्रेता कथित तौर पर इन व्यंजनों को ग्राहकों के सामने तैयार करने और बेचने की बात करता दिखाई देता है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

हालांकि, वीडियो में किए गए दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि वास्तव में किसी स्थान पर कोबरा के मांस से बने पकौड़े या समोसे खुले तौर पर बेचे जा रहे हैं।

लोगों को याद आया सांप का मांस

कुछ देशों और क्षेत्रों में सांप का मांस पारंपरिक भोजन के रूप में खाया जाता है। अलग-अलग जगहों पर इसे सूप, ग्रिल्ड डिश या अन्य व्यंजनों के रूप में परोसे जाने की जानकारी मिलती है।

लेकिन भारत में सांपों को लेकर मामला अलग है। कई प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत संरक्षित हैं। ऐसे में किसी संरक्षित वन्यजीव को पकड़ना, मारना या उसका मांस बेचना गंभीर कानूनी समस्या पैदा कर सकता है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स ने जमकर कमेंट किए। कुछ लोगों ने इसे देखकर हैरानी जताई तो कुछ ने वीडियो को फर्जी या सिर्फ व्यूज बटोरने के लिए बनाया गया कंटेंट बताया।

कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर वीडियो में किया गया दावा सही है तो खाद्य सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत इसकी जांच होनी चाहिए।

वीडियो की सच्चाई जानना जरूरी

सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे वीडियो वायरल होते हैं जिनमें असामान्य या चौंकाने वाले दावे किए जाते हैं। कई बार पुराने वीडियो को नए दावे के साथ शेयर किया जाता है या वीडियो को मनोरंजन के लिए बनाया गया होता है।

इसलिए केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी घटना को सच मानना उचित नहीं है। खासकर जब मामला वन्यजीव और खाद्य पदार्थों से जुड़ा हो, तो आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

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