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सालों तक सास-बहू में रही अनबन, लेकिन बहू की बेटी निकली दादी की हमशक्ल! जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

सालों तक सास-बहू में रही अनबन, लेकिन बहू की बेटी निकली दादी की हमशक्ल! जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

परिवारों में सास-बहू के रिश्तों को लेकर अक्सर कई तरह की कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन एक ऐसा मामला चर्चा में है जिसने लोगों को हैरान कर दिया। सालों तक सास और बहू के बीच अनबन रही, लेकिन जब बहू ने बेटी को जन्म दिया तो परिवार के सभी लोग चौंक गए। वजह थी कि बच्ची का चेहरा और हाव-भाव अपनी दादी से इतने मिलते-जुलते थे कि दोनों को देखकर लोग उन्हें एक-दूसरे की हमशक्ल कहने लगे।

यह दिलचस्प किस्सा सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या किसी बच्चे का अपनी दादी या नानी से इतना अधिक मिलता-जुलता दिखना संभव है? इसका जवाब जेनेटिक्स यानी आनुवंशिकी के विज्ञान में छिपा है।

दादी जैसी क्यों दिख सकती है पोती?

विशेषज्ञों के अनुसार, हर इंसान अपने माता-पिता से लगभग 50-50 प्रतिशत आनुवंशिक सामग्री (DNA) प्राप्त करता है। लेकिन यह जीन किस तरह संयोजित होंगे, यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

कई बार ऐसा होता है कि किसी बच्चे में दादा-दादी या नाना-नानी के कुछ जीन अधिक प्रभावी रूप से सामने आ जाते हैं। यही वजह है कि बच्चा अपने माता-पिता से कम और दादा-दादी या नाना-नानी से ज्यादा मिलता-जुलता दिखाई दे सकता है।

जेनेटिक्स का है पूरा खेल

वैज्ञानिक बताते हैं कि आंखों का रंग, चेहरे की बनावट, नाक का आकार, बालों की बनावट और त्वचा जैसे कई शारीरिक गुण जीन के जरिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते हैं। कुछ जीन कई पीढ़ियों तक निष्क्रिय रहने के बाद भी अगली पीढ़ी में प्रभावी होकर दिखाई दे सकते हैं।

इसी कारण कई बार पोता या पोती अपने दादा-दादी की हूबहू छवि लगते हैं, जबकि माता-पिता से उनकी समानता अपेक्षाकृत कम नजर आती है।

क्या यह कोई असामान्य बात है?

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा होना बिल्कुल सामान्य है। आनुवंशिकी में इसे असामान्य नहीं माना जाता। दुनिया भर में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जहां बच्चे अपने दादा-दादी या नाना-नानी की तरह दिखाई देते हैं।

रिश्ते चाहे जैसे हों, जीन अपना काम करते हैं

इस दिलचस्प घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पारिवारिक रिश्तों में चाहे कितनी भी दूरियां क्यों न हों, लेकिन प्रकृति और आनुवंशिकी अपने नियमों के अनुसार काम करती है। जीन का प्रभाव भावनाओं या रिश्तों से नहीं, बल्कि जैविक विरासत से तय होता है। यही वजह है कि कई बार बच्चे अपने दादा-दादी या नाना-नानी की ऐसी झलक लेकर जन्म लेते हैं, जो पूरे परिवार को हैरान कर देती है।

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