हार्ट अटैक से किसान ने तोड़ा दम, वीडियो में सामने आई जिले की बड़ी स्वास्थ्य समस्या
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। एक किसान की हार्ट अटैक से मौत होने के बाद जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में जिले में 22 लोगों की हार्ट अटैक से मौत होने का दावा किया गया है।
यूपी : लखीमपुर खीरी में हार्टअटैक से एक किसान की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस जिले में बीते 4 साल में हार्टअटैक से 22 लोग मरे हैं। 40 लाख की आबादी वाले खीरी में एक भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है।@zameerahmad_lmp pic.twitter.com/6xTnbTxf73
— Sachin Gupta (@Sachingupta) September 4, 2026
यूपी : लखीमपुर खीरी में हार्टअटैक से एक किसान की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस जिले में बीते 4 साल में हार्टअटैक से 22 लोग मरे हैं। 40 लाख की आबादी वाले खीरी में एक भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है।@zameerahmad_lmp pic.twitter.com/6xTnbTxf73
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सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि करीब 40 लाख की आबादी वाले लखीमपुर खीरी जिले में एक भी कार्डियोलॉजिस्ट यानी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी मरीज को अचानक सीने में दर्द या हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़े, तो उसे तत्काल विशेषज्ञ इलाज कैसे मिलेगा?
हार्ट अटैक जैसी स्थिति में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में किसी बड़े अस्पताल या हृदय रोग विशेषज्ञ तक पहुंचने में देरी मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकती है। ग्रामीण आबादी वाले इस जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर यह स्थिति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
किसान की मौत के बाद अब सोशल मीडिया पर लोग जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी आबादी वाले जिले में कम से कम हृदय रोग विशेषज्ञों की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में बताए गए 22 मौतों के आंकड़े और जिले में कार्डियोलॉजिस्ट की उपलब्धता की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। ऐसे में आधिकारिक स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल, किसान की मौत की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़ी आबादी वाले जिलों में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर और इमरजेंसी स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं?

