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ड्रोन ने बचाई तालाब में डूब रहे 5 साल के बच्चे की जान, पर रेस्क्यू के 2 दिन बाद ही जो हुआ उसने सबको चौंका दिया

ड्रोन ने बचाई तालाब में डूब रहे 5 साल के बच्चे की जान, पर रेस्क्यू के 2 दिन बाद ही जो हुआ उसने सबको चौंका दिया

कभी-कभी तकनीक इंसानी जिंदगी बचाने में ऐसी भूमिका निभाती है, जिसकी कल्पना भी मुश्किल होती है। अमेरिका के मिनेसोटा में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां एक ड्रोन ने तालाब में डूब रहे 5 साल के बच्चे की लोकेशन खोजने में मदद की और समय रहते उसकी जान बचा ली गई। इस रेस्क्यू ऑपरेशन की दुनियाभर में चर्चा हुई, लेकिन इसके सिर्फ दो दिन बाद जो फैसला लिया गया, उसने सभी को हैरान कर दिया।

तालाब में फंस गया था 5 साल का बच्चा

मामला अमेरिका के सेंट पॉल शहर का बताया जा रहा है। पुलिस को सूचना मिली कि एक बच्चा तालाब में डूब रहा है और उसे तत्काल मदद की जरूरत है। बच्चे की हालत बेहद गंभीर थी और हर सेकंड उसकी जिंदगी के लिए महत्वपूर्ण था।

पुलिस टीम ने तुरंत अपना ड्रोन हवा में भेजा। ड्रोन कुछ ही समय में घटनास्थल तक पहुंच गया और उसने तालाब में मौजूद बच्चे की सही लोकेशन पुलिस तक पहुंचाई। बताया गया कि ड्रोन पुलिस अधिकारियों के पहुंचने से करीब दो मिनट पहले मौके पर पहुंच गया था।

ड्रोन की मदद से बची मासूम की जान

ड्रोन ऑपरेटर ने कैमरे के जरिए बच्चे की स्थिति पर नजर रखी और जमीन पर मौजूद अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और तालाब में उतरकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद उसकी हालत सुरक्षित बताई गई। परिवार की ओर से बताया गया कि बच्चा ऑटिज्म से जूझ रहा था और वह बिना बताए घर से निकल गया था।

सोशल मीडिया पर ड्रोन की जमकर तारीफ

घटना का वीडियो और जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग तकनीक की तारीफ करने लगे। यूजर्स का कहना है कि अगर सही समय पर ड्रोन का इस्तेमाल नहीं किया जाता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

कई लोगों ने कहा कि आधुनिक तकनीक सिर्फ सुविधा के लिए नहीं, बल्कि आपात स्थिति में जिंदगी बचाने का जरिया भी बन सकती है।

लेकिन दो दिन बाद आया बड़ा फैसला

इस शानदार रेस्क्यू के बाद भी एक नया विवाद सामने आया। सेंट पॉल सिटी काउंसिल ने पुलिस विभाग में और अधिक ड्रोन शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसके पीछे लोगों की निजता (Privacy) से जुड़ी चिंताओं को कारण बताया गया।

यानी जिस तकनीक ने एक बच्चे की जान बचाने में मदद की, उसी तकनीक को लेकर सुरक्षा और निजी अधिकारों पर बहस भी शुरू हो गई।

तकनीक बनाम निजता की नई बहस

यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कितना और किस तरीके से किया जाना चाहिए। जहां ड्रोन जैसे उपकरण आपदा और रेस्क्यू ऑपरेशन में बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं, वहीं इनके गलत इस्तेमाल को लेकर लोगों की चिंताएं भी बनी हुई हैं।

फिलहाल इस घटना ने एक बात जरूर साबित कर दी है कि सही समय पर सही तकनीक का इस्तेमाल किसी की जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकता है। लेकिन साथ ही यह बहस भी जारी है कि सुरक्षा के लिए तकनीक कितनी जरूरी है और निजता की कीमत पर इसकी सीमा कहां तक होनी

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