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सोसाइटी की बेंच पर बैठे कुत्ते तो छिड़ी बहस, महिला और युवती आमने-सामने; जानिए किसकी बात में कितना दम?
 

सोसाइटी की बेंच पर बैठे कुत्ते तो छिड़ी बहस, महिला और युवती आमने-सामने; जानिए किसकी बात में कितना दम?

नई दिल्ली: सोसाइटी में पालतू कुत्तों को लेकर होने वाली बहस अब एक नई वजह से चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक महिला और एक Gen Z युवती के बीच सोसाइटी की बेंच पर कुत्तों को बैठाने को लेकर तीखी बहस होती दिखाई दे रही है।

बताया जा रहा है कि सोसाइटी के बाहर एक बेंच पर गोल्डन रिट्रीवर और साइबेरियन हस्की बैठे थे। इसे देखकर महिला ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सोसाइटी की सार्वजनिक बेंच लोगों के बैठने के लिए होती हैं, इसलिए उन पर कुत्तों को नहीं बैठाया जाना चाहिए।

वहीं, कुत्तों की मालकिन युवती का तर्क था कि बारिश की वजह से बेंच पहले से ही गीली थी। उसका कहना था कि उसके कुत्ते लंबे समय से उसी बेंच पर बैठते रहे हैं और वह बाद में बेंच को साफ भी कर देती है।


घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की राय बंट गई है। कुछ लोग महिला के तर्क को सही मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि अगर बेंच गीली थी और उसे बाद में साफ कर दिया जाता है, तो पालतू कुत्तों के कुछ देर बैठने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

हालांकि, असल सवाल सोसाइटी के नियमों का है। यदि सोसाइटी की बेंच के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम हैं, तो विवाद का समाधान उसी आधार पर होना चाहिए। सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल में पालतू जानवरों के मालिकों की जिम्मेदारी और अन्य निवासियों की सुविधा—दोनों का ध्यान रखना जरूरी है।

अब सवाल यही है—सोसाइटी की बेंच इंसानों के लिए ही होनी चाहिए या जिम्मेदारी के साथ पालतू जानवरों को भी वहां बैठने की अनुमति मिलनी चाहिए?

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