जनपद में सोमवार को एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां प्रदर्शन कर रहे लोगों को जब जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिले तो उन्होंने प्रतीकात्मक विरोध करते हुए एक कुत्ते को ही ज्ञापन सौंप दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानीय लोग अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर संबंधित विभाग के कार्यालय पहुंचे थे। उनका कहना था कि वे कई बार शिकायत कर चुके थे, लेकिन उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया गया। जब वे अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर अधिकारियों से मिलने पहुंचे, तो उन्हें कार्यालय में कोई जिम्मेदार अफसर मौजूद नहीं मिला।
लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी जब कोई अधिकारी नहीं आया तो प्रदर्शन कर रहे लोगों का गुस्सा बढ़ गया। इसी दौरान उन्होंने अनोखा तरीका अपनाते हुए प्रतीकात्मक विरोध करने का फैसला किया। मौके पर मौजूद एक कुत्ते को पकड़कर उसके सामने ज्ञापन रख दिया गया और उसे ही “प्रतीकात्मक अधिकारी” मानते हुए ज्ञापन सौंपने की बात कही गई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए मौजूद ही नहीं हैं, तो ऐसे में उन्हें यह संदेश देना जरूरी था कि जनता की समस्याओं को किस तरह अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम मजाक के तौर पर नहीं, बल्कि प्रशासन के प्रति नाराजगी जताने का एक प्रतीकात्मक तरीका है।
इस पूरे घटनाक्रम का किसी ने वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग कुत्ते के सामने ज्ञापन रखकर अपनी बात कह रहे हैं और अधिकारी की अनुपस्थिति पर नाराजगी जता रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
कुछ लोग इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही पर करारा व्यंग्य बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अनुचित और अपमानजनक तरीका भी कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर दो तरह की राय देखने को मिल रही है—एक तरफ लोग इसे जनता की मजबूरी और गुस्से का प्रतीक बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ इसे विरोध प्रदर्शन की मर्यादा के खिलाफ माना जा रहा है।
प्रशासन की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, वायरल वीडियो के बाद स्थानीय स्तर पर हलचल जरूर बढ़ गई है और संबंधित विभागों से जवाबदेही तय करने की मांग भी उठ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर अधिकारियों द्वारा जनता की समस्याओं को सुना जाए और समाधान किया जाए, तो इस तरह के अजीब विरोध प्रदर्शन की नौबत ही न आए। उन्होंने मांग की है कि कार्यालयों में जिम्मेदार अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है और सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि विभाग इस अनोखे विरोध पर क्या कार्रवाई करता है और जनता की समस्याओं को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

