सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा वायरल होता रहता है कि दुनिया में हर इंसान के 7 ऐसे लोग होते हैं जिनकी शक्ल बिल्कुल मिलती-जुलती है। यह सुनने में जितना दिलचस्प लगता है, उतना ही लोगों में जिज्ञासा भी पैदा करता है। लेकिन क्या इस दावे के पीछे कोई वैज्ञानिक सच्चाई है?विशेषज्ञों के अनुसार, यह दावा पूरी तरह से प्रमाणित नहीं है। अब तक कोई ऐसा वैज्ञानिक अध्ययन नहीं मिला है जो यह साबित करे कि हर व्यक्ति के ठीक 7 हमशक्ल (doppelganger) मौजूद होते हैं।
असल में इंसानी चेहरा हजारों जेनेटिक और पर्यावरणीय फैक्टर से बनता है, जैसे हड्डियों की बनावट, आंखों की दूरी, नाक का आकार और त्वचा की संरचना। दुनिया की 8 अरब से ज्यादा आबादी में कुछ लोगों की शक्लें मिलती-जुलती हो सकती हैं, लेकिन यह पूरी तरह संयोग (coincidence) पर निर्भर करता है।हालांकि वैज्ञानिक यह जरूर मानते हैं कि सीमित जेनेटिक वेरिएशन के कारण कुछ लोगों के फीचर्स एक-दूसरे से मिल सकते हैं, लेकिन इसका कोई निश्चित “7 हमशक्ल नियम” नहीं है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के दौर में ऐसे दावे अक्सर वायरल हो जाते हैं, जिससे लोग इसे सच मान लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे किसी भी दावे को बिना ठोस सबूत के सही न माना जाए।इसलिए यह कहना कि हर इंसान के ठीक 7 हमशक्ल होते हैं, एक लोकप्रिय मिथक है, न कि वैज्ञानिक तथ्य।

