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45 की उम्र में बैंक जॉब से ‘रिटायर’ हुए कपल ने अरावली की पहाड़ियों पर शुरू किया ‘स्टार्टअप’, बताया- कैसे हो रही हर महीने 10 लाख कमाई

45 की उम्र में बैंक जॉब से ‘रिटायर’ हुए कपल ने अरावली की पहाड़ियों पर शुरू किया ‘स्टार्टअप’, बताया- कैसे हो रही हर महीने 10 लाख कमाई

कहते हैं कि नौकरी जाने का डर इंसान को तोड़ सकता है, लेकिन अगर सोच सकारात्मक हो तो यही मुश्किल जिंदगी बदलने का मौका भी बन सकती है। डेविड और नेहा की कहानी कुछ ऐसी ही है। कॉर्पोरेट और बैंकिंग क्षेत्र की नौकरी से अलग होने के बाद इस कपल ने अरावली की पहाड़ियों के आसपास फार्म शुरू किया। शुरुआती दिनों में उन्हें बिना बिजली के पेड़ के नीचे रातें गुजारनी पड़ीं, लेकिन आज उनका फार्म बिजनेस हर महीने करीब 10 लाख रुपये का कारोबार कर रहा है। 

एक मेमने से शुरू हुआ नया सफर

डेविड और नेहा का सपना पहले से अपना फार्म शुरू करने का था। लेकिन इस सपने को हकीकत में बदलने की वजह बनी एक छोटी सी घटना। एक दिन नेहा ने रास्ते में भेड़ों का झुंड देखा। इसी दौरान एक भेड़ ने एक मेमने को जन्म दिया, लेकिन वह उसे वहीं छोड़कर झुंड के साथ आगे बढ़ गई। नेहा उस मेमने को घर ले आईं और उसकी देखभाल शुरू कर दी।

मेमने को रखने के लिए उन्होंने पलवल के पास एक फार्म की तलाश की। इसी दौरान फार्म के मालिक से उनकी दोस्ती हुई और उन्हें गुड़गांव के पास अपनी जमीन पर कुछ नया शुरू करने का मौका मिला। यहीं से दोनों ने अपने फार्मिंग बिजनेस की शुरुआत की। 

पेड़ के नीचे सोकर गुजारे शुरुआती दिन

शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी। डेविड की नौकरी जा चुकी थी और नए काम को खड़ा करने के लिए उन्हें जमीन पर उतरकर मेहनत करनी पड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दो-तीन महीने उन्होंने बिना बिजली के फार्म में पेड़ के नीचे सोकर गुजारे।

कपल के पास करीब 50 लाख रुपये की बचत थी। उन्होंने सेवरेंस पैकेज का एक हिस्सा फार्म में लगाया और बाकी रकम से घर खरीदा। गुड़गांव के पास उन्होंने करीब 30 हजार रुपये महीने के किराए पर फार्म तैयार किया। 

हरी वैन में सब्जियां लेकर पहुंचे ग्राहकों तक

फार्म में जब सब्जियों का उत्पादन जरूरत से ज्यादा होने लगा तो दोनों ने उन्हें बेचने का तरीका खोजा। डेविड और नेहा अपनी हरी वैन में सब्जियां भरकर गुड़गांव के सेक्टर-15 की सोसायटियों के बाहर पहुंचने लगे। वहां वे लोगों को अपने फार्म के बारे में बताते और ताजी सब्जियां बेचते थे।

धीरे-धीरे उनके ग्राहक बढ़ने लगे और फार्म से होने वाली कमाई का दायरा भी बढ़ता गया।

डेयरी, पोल्ट्री और शहद से 10 लाख का कारोबार

आज उनके फार्म का कारोबार कई हिस्सों में बंटा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल कमाई में करीब 50 प्रतिशत हिस्सा डेयरी उत्पादों से आता है। पोल्ट्री से करीब 15 से 20 प्रतिशत और शुद्ध शहद से लगभग 15 से 20 प्रतिशत कमाई होती है। इन सभी गतिविधियों को मिलाकर फार्म का औसत मासिक कारोबार करीब 10 लाख रुपये बताया गया है। 

इस फार्म से आसपास के लोगों को भी रोजगार मिला है। करीब छह लोग सीधे फार्म पर काम करते हैं, जबकि आसपास के गांवों के 10 से ज्यादा किसान भी इनके साथ जुड़े हुए हैं। किसान पीली सरसों उगाते हैं और फार्म की ओर से उन्हें बीज व तकनीकी मदद दी जाती है। उनकी फसल को उचित कीमत पर खरीदा जाता है। 

नौकरी से अलग होकर बनाया अपनी पसंद का काम

डेविड और नेहा के लिए यह फार्म सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है। दोनों का मानना है कि जब इंसान अपने पसंद के काम को ही अपना पेशा बना लेता है तो काम बोझ नहीं लगता। बैंक और कॉर्पोरेट नौकरी से निकलकर फार्मिंग की दुनिया में कदम रखने वाला यह कपल अब अपनी जिंदगी को उसी तरह जी रहा है, जैसा उन्होंने कभी सपने में सोचा था।

कहते हैं कि नौकरी जाने का डर इंसान को तोड़ सकता है, लेकिन अगर सोच सकारात्मक हो तो यही मुश्किल जिंदगी बदलने का मौका भी बन सकती है। डेविड और नेहा की कहानी कुछ ऐसी ही है। कॉर्पोरेट और बैंकिंग क्षेत्र की नौकरी से अलग होने के बाद इस कपल ने अरावली की पहाड़ियों के आसपास फार्म शुरू किया। शुरुआती दिनों में उन्हें बिना बिजली के पेड़ के नीचे रातें गुजारनी पड़ीं, लेकिन आज उनका फार्म बिजनेस हर महीने करीब 10 लाख रुपये का कारोबार कर रहा है। 

एक मेमने से शुरू हुआ नया सफर

डेविड और नेहा का सपना पहले से अपना फार्म शुरू करने का था। लेकिन इस सपने को हकीकत में बदलने की वजह बनी एक छोटी सी घटना। एक दिन नेहा ने रास्ते में भेड़ों का झुंड देखा। इसी दौरान एक भेड़ ने एक मेमने को जन्म दिया, लेकिन वह उसे वहीं छोड़कर झुंड के साथ आगे बढ़ गई। नेहा उस मेमने को घर ले आईं और उसकी देखभाल शुरू कर दी।

मेमने को रखने के लिए उन्होंने पलवल के पास एक फार्म की तलाश की। इसी दौरान फार्म के मालिक से उनकी दोस्ती हुई और उन्हें गुड़गांव के पास अपनी जमीन पर कुछ नया शुरू करने का मौका मिला। यहीं से दोनों ने अपने फार्मिंग बिजनेस की शुरुआत की। 

पेड़ के नीचे सोकर गुजारे शुरुआती दिन

शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी। डेविड की नौकरी जा चुकी थी और नए काम को खड़ा करने के लिए उन्हें जमीन पर उतरकर मेहनत करनी पड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दो-तीन महीने उन्होंने बिना बिजली के फार्म में पेड़ के नीचे सोकर गुजारे।

कपल के पास करीब 50 लाख रुपये की बचत थी। उन्होंने सेवरेंस पैकेज का एक हिस्सा फार्म में लगाया और बाकी रकम से घर खरीदा। गुड़गांव के पास उन्होंने करीब 30 हजार रुपये महीने के किराए पर फार्म तैयार किया।

हरी वैन में सब्जियां लेकर पहुंचे ग्राहकों तक

फार्म में जब सब्जियों का उत्पादन जरूरत से ज्यादा होने लगा तो दोनों ने उन्हें बेचने का तरीका खोजा। डेविड और नेहा अपनी हरी वैन में सब्जियां भरकर गुड़गांव के सेक्टर-15 की सोसायटियों के बाहर पहुंचने लगे। वहां वे लोगों को अपने फार्म के बारे में बताते और ताजी सब्जियां बेचते थे।

धीरे-धीरे उनके ग्राहक बढ़ने लगे और फार्म से होने वाली कमाई का दायरा भी बढ़ता गया।

डेयरी, पोल्ट्री और शहद से 10 लाख का कारोबार

आज उनके फार्म का कारोबार कई हिस्सों में बंटा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल कमाई में करीब 50 प्रतिशत हिस्सा डेयरी उत्पादों से आता है। पोल्ट्री से करीब 15 से 20 प्रतिशत और शुद्ध शहद से लगभग 15 से 20 प्रतिशत कमाई होती है। इन सभी गतिविधियों को मिलाकर फार्म का औसत मासिक कारोबार करीब 10 लाख रुपये बताया गया है। 

इस फार्म से आसपास के लोगों को भी रोजगार मिला है। करीब छह लोग सीधे फार्म पर काम करते हैं, जबकि आसपास के गांवों के 10 से ज्यादा किसान भी इनके साथ जुड़े हुए हैं। किसान पीली सरसों उगाते हैं और फार्म की ओर से उन्हें बीज व तकनीकी मदद दी जाती है। उनकी फसल को उचित कीमत पर खरीदा जाता है। 

नौकरी से अलग होकर बनाया अपनी पसंद का काम

डेविड और नेहा के लिए यह फार्म सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है। दोनों का मानना है कि जब इंसान अपने पसंद के काम को ही अपना पेशा बना लेता है तो काम बोझ नहीं लगता। बैंक और कॉर्पोरेट नौकरी से निकलकर फार्मिंग की दुनिया में कदम रखने वाला यह कपल अब अपनी जिंदगी को उसी तरह जी रहा है, जैसा उन्होंने कभी सपने में सोचा था।

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