'कॉर्पोरेट जीवन अंतहीन परीक्षाओं जैसा...' बेंगलुरु की महिला ने काम के तनाव से जुड़ी परेशानियां बताईं; Viral हुआ Video
बेंगलुरु को देश का आईटी हब कहा जाता है, जहां हजारों युवा बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरी करते हैं। अच्छी सैलरी और करियर ग्रोथ के साथ कॉर्पोरेट नौकरी की अपनी चुनौतियां भी हैं। इसी बीच बेंगलुरु की एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कॉर्पोरेट जीवन में लगातार बने रहने वाले काम के दबाव और तनाव के बारे में बात की है।
महिला ने कॉर्पोरेट नौकरी की तुलना ‘अंतहीन परीक्षाओं’ से करते हुए बताया कि नौकरी में एक लक्ष्य पूरा होते ही दूसरा सामने आ जाता है। उनके मुताबिक, कई कर्मचारियों के लिए यह लगातार चलने वाला दबाव मानसिक रूप से थका देने वाला हो सकता है।
‘एक परीक्षा खत्म होती है, दूसरी शुरू’
वायरल वीडियो में महिला कॉर्पोरेट नौकरी से जुड़ी अपनी परेशानियों के बारे में बताती हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई के दौरान छात्रों को लगता है कि परीक्षा और असाइनमेंट खत्म होने के बाद राहत मिलेगी, लेकिन कॉर्पोरेट जीवन में ऐसा नहीं होता।
नौकरी में एक प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद दूसरा प्रोजेक्ट, एक डेडलाइन के बाद दूसरी डेडलाइन और एक टारगेट हासिल करने के बाद नया टारगेट सामने आ जाता है। इस वजह से कई बार कर्मचारी लगातार खुद को साबित करने के दबाव में महसूस कर सकते हैं।
इसी स्थिति को महिला ने ‘अनंत परीक्षाओं’ जैसा बताया है।
काम के साथ लगातार बना रहता है दबाव
महिला के मुताबिक, कॉर्पोरेट नौकरी में सिर्फ ऑफिस के निर्धारित घंटों के दौरान काम करना ही चुनौती नहीं है। कई कर्मचारियों को मीटिंग, ईमेल, मैसेज और डेडलाइन के कारण ऑफिस के बाद भी काम के बारे में सोचना पड़ता है।
बेंगलुरु जैसे आईटी हब में काम करने वाले लोगों के लिए अलग-अलग टाइम जोन में काम करने वाली टीमों के साथ मीटिंग भी सामान्य बात है। इससे काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना कई बार मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, यह हर कर्मचारी का अनुभव नहीं है। कंपनी, टीम, पद, मैनेजर और काम की प्रकृति के आधार पर कॉर्पोरेट जीवन का अनुभव अलग-अलग हो सकता है।
वीडियो पर लोगों ने शेयर किए अपने अनुभव
महिला का वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई। कई लोगों ने अपने कॉर्पोरेट अनुभव साझा करते हुए कहा कि नौकरी में एक लक्ष्य पूरा होने के बाद तुरंत अगले लक्ष्य पर ध्यान देना पड़ता है।
कुछ यूजर्स ने कहा कि कॉर्पोरेट जीवन में उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए भी ज्यादा समय नहीं मिलता, क्योंकि अगली डेडलाइन सामने खड़ी होती है। वहीं कुछ लोगों ने इसे आधुनिक वर्क कल्चर का हिस्सा बताया।
एक यूजर ने लिखा कि स्कूल और कॉलेज में परीक्षा के बाद छुट्टी मिल जाती थी, लेकिन नौकरी में ‘संडे के बाद फिर वही सोमवार’ शुरू हो जाता है।
वर्क-लाइफ बैलेंस पर फिर चर्चा
महिला के वीडियो ने एक बार फिर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस छेड़ दी है। कॉर्पोरेट नौकरी में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद कर्मचारियों को प्रेरित कर सकती है, लेकिन अगर काम का दबाव लंबे समय तक बना रहे तो इसका असर निजी समय और जीवनशैली पर भी पड़ सकता है।
इसी वजह से कई लोग अब नौकरी चुनते समय केवल सैलरी और पद नहीं, बल्कि काम के घंटे, कंपनी की संस्कृति और निजी जिंदगी के लिए मिलने वाले समय को भी महत्व देते हैं।
फिलहाल बेंगलुरु की महिला का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। ‘कॉर्पोरेट जीवन अंतहीन परीक्षाओं जैसा है’ वाली उनकी बात उन तमाम कर्मचारियों से जुड़ती नजर आ रही है, जो हर दिन नई डेडलाइन और नए लक्ष्य के बीच खुद को साबित करने की कोशिश करते हैं।

