सफाई हुई फिर भी दोबारा लगवाई झाड़ू! रेलवे स्टेशन का वीडियो देख भड़कीं इन्फ्लुएंसर माया
रेलवे स्टेशन पर सफाई व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला चर्चा में है, जिसने सिस्टम के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन्फ्लुएंसर माया ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वहां सफाई पर ध्यान देने के बजाय सफाई का प्रदर्शन किया जा रहा था। उनके मुताबिक, एक सफाईकर्मी ने पहले कूड़ेदान से कचरा निकाला और प्लेटफॉर्म की सफाई की। इस दौरान एक व्यक्ति कैमरे से उसकी तस्वीर ले रहा था।
यह है इन्फ्लुएंसर माया, जो रेलवे स्टेशन पर बैठी हुई थी, जहां सफाई करने का नहीं, बल्कि 'सफाई का नाटक' करने का कॉम्पिटिशन चल रहा था।
— Vishal M. Yadav (@VishalMYadav_) October 10, 2026
माया प्लेटफॉर्म पर शांति से बैठी है, तभी सफाई कर्मचारी कचरे के डिब्बे से कचरा निकलता है,
फिर उसे झाड़ू से साफ करता है और एक आदमी उसको कैमरा से फोटो… pic.twitter.com/tiQ0Vot9YX
यह है इन्फ्लुएंसर माया, जो रेलवे स्टेशन पर बैठी हुई थी, जहां सफाई करने का नहीं, बल्कि 'सफाई का नाटक' करने का कॉम्पिटिशन चल रहा था।
— Vishal M. Yadav (@VishalMYadav_) October 10, 2026
माया प्लेटफॉर्म पर शांति से बैठी है, तभी सफाई कर्मचारी कचरे के डिब्बे से कचरा निकलता है,
फिर उसे झाड़ू से साफ करता है और एक आदमी उसको कैमरा से फोटो… pic.twitter.com/tiQ0Vot9YX
माया को सबसे ज्यादा हैरानी तब हुई, जब उनके अनुसार सफाई पूरी होने के बाद भी सफाईकर्मी से दोबारा कचरा फैलाकर सफाई करवाने की स्थिति बनी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सफाईकर्मी अपना काम कर चुका था, तो उससे वही काम दोबारा करवाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
सफाईकर्मी के पैर पर पट्टी, फिर भी करना पड़ा काम
माया ने अपनी बात में सफाईकर्मी की शारीरिक परेशानी का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, कर्मचारी के पैर पर पट्टी बंधी हुई थी और वह लंगड़ाकर चल रहा था। इसके बावजूद उससे बार-बार सफाई करवाने की बात उन्हें बेहद अजीब लगी।इस घटना को लेकर माया का सवाल है कि क्या सफाई का असली मकसद स्टेशन को साफ रखना है या फिर कैमरे के सामने सफाई करवाकर व्यवस्था को बेहतर दिखाना? अगर सफाई हो चुकी थी, तो सिर्फ तस्वीर या रिकॉर्ड के लिए उसी प्रक्रिया को दोहराने का औचित्य क्या था?
डिजिटल डैशबोर्ड से नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए सुधार
रेलवे प्रशासन में डिजिटल निगरानी और रिकॉर्ड के जरिए कामकाज पर नजर रखने की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। वेंडर्स और ठेकेदारों के काम की डिजिटल निगरानी से जवाबदेही बढ़ सकती है, लेकिन केवल तस्वीरों और ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना पर्याप्त नहीं है।जरूरत इस बात की है कि अधिकारी यह भी देखें कि प्लेटफॉर्म वास्तव में साफ है या नहीं, कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो रहा है या नहीं और उन्हें काम करने के लिए उचित परिस्थितियां मिल रही हैं या नहीं।
सफाई का दिखावा या जवाबदेही की कमी?
अगर माया के बताए घटनाक्रम की पुष्टि होती है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि काम की गुणवत्ता से ज्यादा उसके प्रदर्शन पर जोर क्यों दिया गया। किसी भी व्यवस्था का उद्देश्य केवल रिपोर्ट में अच्छे आंकड़े दिखाना नहीं, बल्कि जमीन पर बेहतर परिणाम देना होना चाहिए।सफाईकर्मी भी इस व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। उनके काम का सम्मान करना और उनकी स्थिति का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है, जितना सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना।

