बिना IIT-IIM भी मिल सकती है बड़ी नौकरी? Google कर्मचारी ने बताया सिलेक्शन का ‘सीक्रेट फॉर्मूला’
टेक्नोलॉजी सेक्टर में नौकरी पाने के लिए अक्सर माना जाता है कि Indian Institutes of Technology या Indian Institutes of Management जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की डिग्री जरूरी है, लेकिन हाल ही में एक Google कर्मचारी के बयान ने इस धारणा पर नई बहस छेड़ दी है।
Google में कार्यरत एक कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर बताया कि बड़े टेक कंपनियों में सिलेक्शन का असली फोकस सिर्फ डिग्री पर नहीं, बल्कि स्किल्स और प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी पर होता है। उनके अनुसार, “सीक्रेट फॉर्मूला” कोई एक डिग्री नहीं बल्कि सही तैयारी, सोचने की क्षमता और लगातार अभ्यास है।
क्या है “सीक्रेट फॉर्मूला”?
कर्मचारी के मुताबिक, इंटरव्यू प्रोसेस में तीन चीजें सबसे ज्यादा मायने रखती हैं:
- डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम की मजबूत समझ
- रियल-लाइफ प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स
- कम्युनिकेशन और थिंकिंग प्रोसेस को स्पष्ट रूप से समझाना
उन्होंने कहा कि कई बार नॉन-IIT और नॉन-IIM उम्मीदवार भी बेहतरीन प्रदर्शन करके बड़ी कंपनियों में जगह बना लेते हैं, क्योंकि वे लगातार प्रैक्टिस करते हैं और कॉन्सेप्ट्स को गहराई से समझते हैं।
इंटरव्यू में क्या देखा जाता है?
टेक कंपनियों में भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों से अक्सर कोडिंग राउंड, सिस्टम डिजाइन और बिहेवियरल इंटरव्यू लिए जाते हैं। इसमें यह देखा जाता है कि उम्मीदवार किसी समस्या को कैसे समझता है और उसे कितने सरल और प्रभावी तरीके से हल करता है।
कर्मचारी ने बताया कि “कई उम्मीदवार टॉप कॉलेज से होते हैं, लेकिन प्रैक्टिकल स्किल्स की कमी के कारण इंटरव्यू में पीछे रह जाते हैं, जबकि कुछ सामान्य कॉलेज से आने वाले लोग मजबूत तैयारी के कारण चयनित हो जाते हैं।”
क्यों बदल रहा है सिलेक्शन का ट्रेंड?
टेक इंडस्ट्री में तेजी से बदलाव के कारण अब कंपनियां सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल-बेस्ड हायरिंग पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। खासकर AI, क्लाउड और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में प्रैक्टिकल नॉलेज को प्राथमिकता दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत होगा, जहां “क्या जानते हो” ज्यादा महत्वपूर्ण होगा, न कि “कहां से पढ़े हो।”

