कोंडागांव में डिजिटल रिकॉर्ड की बड़ी गलती, जीवित महिला को घोषित किया गया ‘मृत’, पेंशन और राशन ठप
छत्तीसगढ़ के Kondagaon से एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने सरकारी डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली की खामियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां संध्या मंडल नाम की महिला को रिकॉर्ड में गलती से मृत घोषित कर दिया गया, जिसके चलते उनकी सरकारी पेंशन और राशन पिछले करीब 5 महीनों से बंद है।
जानकारी के अनुसार, संध्या मंडल पूरी तरह जीवित हैं और अपने अस्तित्व के सभी आवश्यक प्रमाण भी संबंधित विभागों में प्रस्तुत कर चुकी हैं। इसके बावजूद, डिजिटल रिकॉर्ड में हुई त्रुटि के कारण उनका नाम लाभार्थियों की सूची से हटा दिया गया, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया।
पीड़िता का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय दफ्तरों के चक्कर लगाए और अधिकारियों को जीवित होने के दस्तावेज भी दिखाए, लेकिन सुधार की प्रक्रिया बेहद धीमी बनी हुई है। इस वजह से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला डिजिटल डेटा एंट्री या अपडेटिंग में हुई गलती से जुड़ा हो सकता है, जिसमें किसी तकनीकी या मानवीय त्रुटि के कारण लाभार्थी की स्थिति गलत दर्ज हो गई। ऐसे मामलों में सुधार के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के डिजिटलाइजेशन से पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन डेटा एंट्री और सत्यापन में छोटी सी गलती भी आम लोगों के जीवन पर बड़ा असर डाल सकती है। इसलिए नियमित ऑडिट और त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली बेहद जरूरी है।
यह मामला अब स्थानीय प्रशासन के लिए भी चुनौती बन गया है और सुधार प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। हालांकि अभी तक संध्या मंडल को सभी लाभ बहाल नहीं हो पाए हैं।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि डिजिटल सिस्टम तभी प्रभावी है जब उसमें मानवीय सत्यापन और जवाबदेही भी मजबूत हो, ताकि ऐसी गंभीर गलतियां दोबारा न हों।

