बेंगलुरु की महिला ने बताया, एवरेज खाना बनाने वाले रसोइयों को 8000 रुपये महीना क्यों दे रहे लोग
बेंगलुरु में घरेलू कामगारों और रसोइयों की मांग को लेकर एक महिला की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है। महिला ने बताया कि शहर में कुछ ऐसे रसोइए भी हैं, जिनके खाना बनाने की गुणवत्ता औसत होने के बावजूद उन्हें हर महीने करीब 8 हजार रुपये तक दिए जा रहे हैं। इसके पीछे वजह सिर्फ खाना स्वादिष्ट होना नहीं, बल्कि बेंगलुरु की तेज रफ्तार जिंदगी और घरेलू मदद की बढ़ती जरूरत है।
महिला के मुताबिक, शहर में नौकरी करने वाले कई लोगों के पास रोज खाना बनाने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता। खासकर पति-पत्नी दोनों के नौकरी करने वाले परिवारों में खाना बनाना, सब्जियां काटना, बर्तन और किचन की तैयारी जैसे काम रोज की दिनचर्या का अतिरिक्त बोझ बन जाते हैं। ऐसे में लोग घर पर खाना बनाने वाले व्यक्ति को रखने के लिए पैसे खर्च करने को तैयार हैं।
स्वाद से ज्यादा सुविधा की कीमत
महिला ने अपनी पोस्ट में बताया कि कई परिवारों के लिए रसोइए का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें रोजाना खाना बनाने की चिंता नहीं करनी पड़ती। भले ही खाना किसी रेस्टोरेंट जैसा शानदार न हो, लेकिन घर पर समय पर भोजन तैयार मिल जाना लोगों के लिए बड़ी सुविधा है।
बेंगलुरु जैसे शहर में जहां लंबे समय तक ऑफिस में काम करना और आने-जाने में घंटों लगना आम बात है, वहां घरेलू काम के लिए मदद लेना कई लोगों की जरूरत बन गया है। ऐसे में रसोइए की सेवाओं को केवल खाने के स्वाद के आधार पर नहीं देखा जाता।
8 हजार रुपये क्यों देने को तैयार हैं लोग?
महिला के अनुसार, 8 हजार रुपये महीने का भुगतान कई परिवारों के लिए समय बचाने की कीमत है। अगर कोई व्यक्ति रोजाना खाना बनाने में एक से दो घंटे लगाता है, तो महीने में काफी समय सिर्फ किचन के काम में चला जाता है। कामकाजी लोगों के लिए यही समय आराम, परिवार या दूसरी जरूरी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके अलावा नियमित रूप से घर पर खाना बनाने वाला व्यक्ति परिवार की जरूरत के हिसाब से भोजन तैयार कर सकता है। इससे रोज खाना ऑर्डर करने या बाहर खाने पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय
महिला की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए। कुछ लोगों ने कहा कि बेंगलुरु में घरेलू मदद की मांग लगातार बढ़ रही है और अच्छे कामगार मिलने में मुश्किल होती है। वहीं कुछ लोगों का कहना था कि 8 हजार रुपये कम नहीं हैं और खाना बनाने की गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए।
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि घरेलू कामगारों की सैलरी को केवल खाना बनाने की गुणवत्ता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। समय की पाबंदी, साफ-सफाई, भरोसेमंद व्यवहार, नियमितता और घर की जरूरतों के अनुसार काम करना भी उनकी सेवा का हिस्सा है।
दरअसल, बेंगलुरु में बढ़ती आबादी, आईटी सेक्टर की नौकरियां और व्यस्त जीवनशैली ने घरेलू सेवाओं की मांग को बढ़ाया है। ऐसे में कई परिवारों के लिए रसोइया अब लग्जरी नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सुविधा बनता जा रहा है। यही वजह है कि औसत खाना बनाने वाले व्यक्ति को भी नियमित काम और तय मासिक भुगतान मिल सकता है।

