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गाजियाबाद में भिखारी भी हुए डिजिटल! बच्चा गोद में लेकर भीख मांग रही लड़की ने दिखाया QR कोड, देखें वीडियो 

गाजियाबाद में भिखारी भी हुए डिजिटल! बच्चा गोद में लेकर भीख मांग रही लड़की ने दिखाया QR कोड, देखें वीडियो 

डिजिटल इंडिया का असर अब रोजमर्रा की जिंदगी के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देने लगा है। ऑनलाइन पेमेंट और UPI का इस्तेमाल दुकानों से लेकर छोटी-छोटी खरीदारी तक आम हो चुका है। लेकिन गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन सकता है।


एक व्यक्ति के मुताबिक, वह रात में गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके से गुजर रहा था। इसी दौरान उसकी नजर ट्रैफिक सिग्नल पर भीख मांग रही करीब 20 से 25 साल की एक युवती पर पड़ी। युवती की गोद में लगभग छह महीने का बच्चा था और वह गाड़ियों में बैठे लोगों से मदद मांग रही थी।

कैश नहीं मिला तो युवती ने बताया ऑनलाइन पेमेंट का रास्ता

व्यक्ति के मुताबिक, उससे पहले एक कार चालक ने युवती को पैसे देने से इनकार कर दिया था। युवती बार-बार बच्चे की ओर इशारा करते हुए मदद मांग रही थी। इसके बाद उसने कथित तौर पर अपनी जेब से एक चीज निकाली और कार चालक को दिखाई, फिर उसे वापस रख लिया।

जब युवती उस व्यक्ति की गाड़ी के पास पहुंची, तो उसने उससे पूछ लिया कि उसने कार चालक को क्या दिखाया था। युवती ने जवाब दिया कि कार चालक के पास खुले पैसे नहीं थे, इसलिए उसने उसे ऑनलाइन पैसे भेजने के लिए कहा था।

भीख के लिए QR कोड? सुनकर शख्स रह गया हैरान

युवती ने कथित तौर पर बताया कि अगर किसी के पास नकद पैसे नहीं हैं, तो वह उसके QR कोड को स्कैन करके ऑनलाइन भुगतान कर सकता है। यह सुनकर व्यक्ति हैरान रह गया। उसके मुताबिक, डिजिटल भुगतान का यह तरीका अब सड़क पर मदद मांगने के दौरान भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

व्यक्ति ने बताया कि उसने अपनी कार के डैशबोर्ड से 20 रुपये निकालकर युवती को दे दिए। उसने इस घटना को डिजिटल इंडिया से जोड़ते हुए कहा कि अब भीख मांगने वाले लोग भी ऑनलाइन पेमेंट का विकल्प अपना रहे हैं।

डिजिटल इंडिया की पहुंच पर चर्चा

इस किस्से से एक बार फिर पता चलता है कि UPI और डिजिटल भुगतान लोगों के बीच कितनी तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। आज कई लोग नकद पैसे रखने के बजाय मोबाइल से भुगतान करना पसंद करते हैं। हालांकि, इस घटना में QR कोड के इस्तेमाल और युवती की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे साझा किए गए अनुभव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

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