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18 महीने की मासूम की मौत के बाद सोशल मीडिया के दावे पर ‘पुनर्जीवित’ करने की कोशिश, अंधविश्वास पर उठे सवाल

18 महीने की मासूम की मौत के बाद सोशल मीडिया के दावे पर ‘पुनर्जीवित’ करने की कोशिश, अंधविश्वास पर उठे सवाल

डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया जानकारी का सबसे तेज माध्यम बन चुका है, वहीं इसके जरिए फैल रही भ्रामक जानकारियां और अंधविश्वास कई बार गंभीर परिणाम भी दे रही हैं। ऐसा ही एक दर्दनाक मामला कर्नाटक के बागलकोट जिले से सामने आया है, जिसने पूरे देश में चिंता और बहस को जन्म दे दिया है।

जानकारी के अनुसार, एक 18 महीने की मासूम बच्ची पानी से भरे एक गड्ढे (नाली) में गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई। यह घटना परिवार के लिए गहरा आघात लेकर आई।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने इस दुखद घटना को और भी गंभीर बना दिया। बताया जा रहा है कि माता-पिता ने सोशल मीडिया पर सामने आए एक दावे पर भरोसा करते हुए बच्ची को “पुनर्जीवित” करने का प्रयास किया। यह दावा किसी अज्ञात पोस्ट या वीडियो के जरिए सामने आया था, जिसमें जीवन वापस लाने से जुड़ी भ्रामक जानकारी बताई गई थी।

परिवार ने भावनात्मक स्थिति में आकर उस जानकारी को सच मान लिया और उसी आधार पर बच्ची को दोबारा जीवित करने की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका।

यह घटना सामने आने के बाद विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली गैर-वैज्ञानिक और अप्रमाणित जानकारियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में भावनात्मक रूप से टूटे हुए लोग अक्सर बिना जांचे-परखे दावों पर भरोसा कर लेते हैं, जिससे स्थिति और भी दर्दनाक हो जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आपात स्थिति या मृत्यु जैसी परिस्थिति में केवल प्रमाणित मेडिकल प्रक्रियाओं और डॉक्टरों की सलाह पर ही भरोसा करना चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे दावे कई बार वैज्ञानिक आधार से पूरी तरह रहित होते हैं।

फिलहाल यह मामला समाज में जागरूकता की जरूरत को उजागर कर रहा है कि कैसे डिजिटल जानकारी का सही उपयोग और सत्यापन न होने पर गंभीर नुकसान हो सकता है।

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