पाकिस्तान में बसा है एक और 'मिनी बिहार', बीफ के बीच मिलेगा लिट्टी-चोखा का जायका, उर्दू के साथ बोली जाती है भोजपुरी
भारत से बाहर भी कई ऐसी जगहें हैं, जहां भारतीय संस्कृति, भाषा और खानपान की झलक देखने को मिलती है। पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी एक ऐसा इलाका है, जिसे लोग अनौपचारिक रूप से 'मिनी बिहार' के नाम से जानते हैं। यहां रहने वाले लोगों की बोली, खानपान और परंपराओं में बिहार की मिट्टी की खुशबू महसूस की जा सकती है। खास बात यह है कि यहां उर्दू के साथ-साथ भोजपुरी भाषा भी बोली जाती है और बिहार का प्रसिद्ध व्यंजन लिट्टी-चोखा भी लोगों के बीच लोकप्रिय है।
दरअसल, पाकिस्तान के कराची शहर में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से गए लोगों की बड़ी आबादी रहती है। विभाजन के समय और उसके बाद बड़ी संख्या में लोग भारत के इन क्षेत्रों से पाकिस्तान गए थे। समय के साथ उन्होंने वहां अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान बनाए रखी। कराची के कई इलाकों में आज भी भोजपुरी बोलने वाले परिवार मिल जाते हैं।
इन समुदायों ने अपनी पुरानी परंपराओं और खानपान को भी संभालकर रखा है। यहां त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों और खास मौकों पर बिहार के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। इनमें लिट्टी-चोखा भी शामिल है, जो बिहार की पहचान माने जाने वाले व्यंजनों में से एक है।
लिट्टी-चोखा आमतौर पर गेहूं के आटे की गोलियों और सत्तू से तैयार किया जाता है। इसे बैंगन, आलू और टमाटर से बने चोखे के साथ परोसा जाता है। भारत में यह व्यंजन बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेहद लोकप्रिय है। पाकिस्तान में बसे बिहारी समुदाय ने भी इस स्वाद को अपनी नई पीढ़ी तक पहुंचाया है।
कराची जैसे महानगर में जहां अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं के लोग रहते हैं, वहां यह समुदाय अपनी पहचान बनाए हुए है। यहां उर्दू प्रमुख भाषा है, लेकिन घरों और समुदायों के बीच भोजपुरी, हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल भी सुनने को मिल सकता है।
इस इलाके की खासियत सिर्फ भाषा और खाने तक सीमित नहीं है। यहां रहने वाले लोग अपने पूर्वजों की संस्कृति, लोकगीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों को भी आगे बढ़ा रहे हैं। शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रमों में आज भी बिहार की कई झलक देखने को मिलती है।
हालांकि, पाकिस्तान में रहने वाले बिहारी मूल के लोगों का इतिहास कई सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ा रहा है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखा है। यही वजह है कि कराची के कुछ हिस्सों में आज भी बिहार की बोली और स्वाद की पहचान दिखाई देती है।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बसे भारतीय मूल के लोग अपनी संस्कृति को जीवित रखते हैं। पाकिस्तान का यह 'मिनी बिहार' भी इसी का एक उदाहरण है, जहां हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद लोगों की जुबान पर भोजपुरी और थाली में लिट्टी-चोखा का स्वाद आज भी मौजूद है।

