कोटा अस्पताल के बाहर कथित तांत्रिक क्रिया का मामला वायरल, 9 साल पुराने मरीज की ‘आत्मा लेने’ का दावा चर्चा में
राजस्थान के कोटा से एक हैरान करने वाला और विवादित मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी है। दावा किया जा रहा है कि एक अस्पताल के बाहर मृत व्यक्ति के परिवार द्वारा “आत्मा लेने” के उद्देश्य से तांत्रिक क्रिया की गई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
मामला लगभग 9 साल पहले इलाज के दौरान मृत घोषित किए गए एक व्यक्ति से जुड़ा बताया जा रहा है, जो मूल रूप से भीलवाड़ा जिले का रहने वाला था। जानकारी के अनुसार, उस व्यक्ति की मौत उस समय अस्पताल में इलाज के दौरान हुई थी। अब वर्षों बाद अचानक उसका परिवार कोटा के उसी अस्पताल परिसर में पहुंचा, जहां यह घटना हुई थी।
Bhilwara से आए परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर कुछ धार्मिक और तांत्रिक गतिविधियां कीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वहां कुछ देर के लिए मंत्रोच्चारण और पारंपरिक अनुष्ठान जैसे दृश्य देखने को मिले, जिससे आसपास मौजूद लोग हैरान रह गए।
स्थानीय लोगों का दावा है कि परिवार का मानना था कि मृतक की “आत्मा” किसी कारणवश वहीं अटकी हुई है, और उसे वापस ले जाने के लिए यह क्रिया की गई। हालांकि, इस तरह के दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और न ही अस्पताल प्रशासन या किसी आधिकारिक स्रोत ने इसकी पुष्टि की है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि उन्हें इस तरह की किसी भी “तांत्रिक गतिविधि” की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी और यह पूरा मामला बाहर परिसर में हुआ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल के अंदर किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाती।
वहीं, स्थानीय पुलिस ने भी मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थिति की जांच की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि अस्पताल परिसर या सार्वजनिक स्थान पर कोई अवैध या अंधविश्वास से जुड़ी गतिविधि हुई है, तो मामले की जांच की जाएगी।
सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ यूज़र्स इसे गहरे अंधविश्वास का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे मानसिक और भावनात्मक आघात से जुड़ी पारिवारिक प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं।
सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अंधविश्वास और भावनात्मक विश्वास अक्सर मिलकर जटिल स्थितियां पैदा कर देते हैं। हालांकि, आधुनिक समाज में इस तरह की प्रथाओं को लेकर जागरूकता और शिक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल, यह मामला जांच और चर्चा के केंद्र में है और प्रशासन द्वारा किसी भी आधिकारिक निष्कर्ष की प्रतीक्षा की जा रही है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के समय में भी अंधविश्वास और पारंपरिक मान्यताएं समाज पर गहरा प्रभाव बनाए हुए हैं।

