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उम्र 75, शरीर में दर्द और साथ देने वाला कोई नहीं, पेट पालने के लिए टैक्सी चला रहे हैं बुजुर्ग…इमोशनल कर देगी ये कहानी
 

उम्र 75, शरीर में दर्द और साथ देने वाला कोई नहीं, पेट पालने के लिए टैक्सी चला रहे हैं बुजुर्ग…इमोशनल कर देगी ये कहानी

उम्र के जिस पड़ाव पर ज्यादातर लोग आराम करना चाहते हैं, परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं और जिंदगी की थकान उतारना चाहते हैं, उसी उम्र में एक बुजुर्ग आज भी सड़क पर टैक्सी चलाने को मजबूर हैं। 75 साल की उम्र में शरीर दर्द से परेशान है, लेकिन पेट पालने के लिए उन्हें रोजाना गाड़ी लेकर सड़क पर निकलना पड़ता है। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों को भावुक कर रही है।

बताया जा रहा है कि बुजुर्ग के साथ उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में रोजमर्रा के खर्च और खाने-पीने का इंतजाम करने के लिए उन्हें खुद ही काम करना पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर पहले जैसा साथ नहीं देता, लेकिन जिम्मेदारियां कम नहीं हुई हैं। यही वजह है कि वह अपनी टैक्सी चलाकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में बुजुर्ग टैक्सी चलाते नजर आते हैं। चेहरे पर उम्र की थकान साफ दिखाई देती है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने काम को लेकर मजबूती से खड़े हैं। उनकी कहानी यह सोचने पर मजबूर करती है कि हर बुजुर्ग के पीछे एक ऐसा परिवार हो, जो उसका सहारा बने, यह जरूरी नहीं है।

75 साल की उम्र में रोजाना कई घंटे सड़क पर वाहन चलाना आसान काम नहीं है। ट्रैफिक, गर्मी, थकान और शरीर का दर्द—इन सबके बीच उन्हें अपना काम जारी रखना पड़ता है। इसके बावजूद वह किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय मेहनत करके अपनी जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस कहानी ने सोशल मीडिया यूजर्स को भावुक कर दिया है। कई लोगों का कहना है कि बुजुर्ग अवस्था में किसी व्यक्ति को इस तरह रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करते देखना बेहद पीड़ादायक है। वहीं कुछ लोगों ने उनकी मेहनत और आत्मसम्मान की तारीफ की है।

बुजुर्ग की कहानी समाज के उस वर्ग की ओर भी ध्यान खींचती है, जो उम्र बढ़ने के बाद भी आर्थिक मजबूरियों के कारण काम करने के लिए मजबूर है। ऐसे लोगों के लिए परिवार के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा और सरकारी सहायता भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि इस बुजुर्ग की पहचान, स्थान और उनकी पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़ी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे अतिरिक्त दावों की पुष्टि मूल स्रोत या संबंधित व्यक्ति से जानकारी मिलने के बाद ही की जा सकती है।

फिलहाल उनकी कहानी लोगों को भावुक करने के साथ एक बड़ा सवाल भी छोड़ रही है—क्या किसी बुजुर्ग को जिंदगी के इस पड़ाव पर भी सिर्फ दो वक्त की रोटी के लिए सड़क पर मेहनत करनी पड़नी चाहिए?

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