आखिर हर रात किसकी दर्दभरी सिसिकियों से गूंज उठता है भानगढ़ किला, 2 मिनट के वीडियो में जाने इतिहास की परतों में छुपा रहस्य
भारत में भूतिया कहानियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब भी डरावने स्थलों का जिक्र होता है, तो भानगढ़ का नाम सबसे पहले लिया जाता है। अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा भानगढ़ का किला, अपनी रहस्यमयी कहानियों और रात के समय गूंजती दर्दनाक सिसकियों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। आखिर क्या है इस किले के भीतर जो हर रात उसे भयावह सिसकियों से भर देता है? किसकी आत्मा है जो शांति न पा सकी और आज भी दर्द के साये में कराहती है?
इतिहास की परतों में छुपा रहस्य
भानगढ़ किले का निर्माण 17वीं सदी में राजा माधो सिंह ने कराया था, जो आमेर के महान शासक मान सिंह के छोटे भाई थे। एक समय यह इलाका समृद्ध और जीवंत था। लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि पूरा नगर वीरान हो गया और इस पर हमेशा के लिए एक डरावनी चुप्पी छा गई?लोककथाओं के अनुसार, भानगढ़ पर एक जादूगर सिंघिया का श्राप है। कहा जाता है कि सिंघिया एक तांत्रिक था, जिसे रत्नावती नामक राजकुमारी से प्रेम हो गया था। रत्नावती अपनी अद्भुत सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थीं। तांत्रिक ने उन्हें वश में करने के लिए जादू-टोने का सहारा लिया। लेकिन राजकुमारी उसकी चाल समझ गई और जादुई तेल को उल्टा तांत्रिक पर फेंक दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। मरते समय तांत्रिक ने पूरे भानगढ़ को श्राप दिया कि यह नगर नष्ट हो जाएगा और यहां कोई भी जीवित नहीं बचेगा।
रात के समय किले की भयावहता
सरकारी निर्देशों के अनुसार, सूरज ढलने के बाद भानगढ़ किले में प्रवेश वर्जित है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने भी चेतावनी के बोर्ड लगा रखे हैं: "सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले भानगढ़ परिसर में प्रवेश निषिद्ध है।" स्थानीय लोग दावा करते हैं कि रात के समय किले से दर्दनाक चीखें और भयानक सिसकियों की आवाजें आती हैं, जैसे कोई आत्मा अपनी पीड़ा बयां कर रही हो।पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की गवाहियों के अनुसार, कई बार लोगों ने अस्पष्ट आकृतियों को भटकते हुए देखा है। कुछ का कहना है कि रात के समय किसी स्त्री के रोने और मदद के लिए पुकारने की आवाजें साफ सुनाई देती हैं। कई ने यह भी दावा किया कि वहां अजीब-सी ठंडी हवा चलती है, जिससे असामान्य भय का अनुभव होता है।
वैज्ञानिक नजरिया
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो भानगढ़ की घटनाओं को मनोवैज्ञानिक प्रभाव और प्राकृतिक घटनाओं का परिणाम बताया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वीरान और खंडहर जैसे स्थान, खासकर जहां ऐतिहासिक त्रासदी से जुड़े किस्से प्रचलित हों, वहां इंसानी दिमाग भयभीत होकर भ्रम उत्पन्न कर सकता है। मगर फिर भी, भानगढ़ जैसा रहस्यमय वातावरण और लगातार सामने आती असाधारण घटनाएं इस तर्क को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पातीं।
पर्यटन और लोकप्रियता
भानगढ़ का रहस्य आज इसे भारत के सबसे लोकप्रिय 'हॉन्टेड टूरिज्म' स्थलों में से एक बनाता है। दुनिया भर से जिज्ञासु सैलानी यहाँ आते हैं ताकि इस डरावने माहौल का अनुभव कर सकें। दिन के समय भानगढ़ सुंदर खंडहरों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केन्द्र है, लेकिन रात के बाद का समय एक अलग ही भयावह कहानी कहता है।आस-पास के गांवों के लोग भी किले से दूर रहना पसंद करते हैं। कई ग्रामीणों का मानना है कि भानगढ़ की सीमा के भीतर रात बिताना सीधा मौत को बुलावा देना है। इसी डर की वजह से आज भी भानगढ़ के चारों ओर बसावट बहुत सीमित है।
रहस्य अभी भी बरकरार
भानगढ़ के सिसकियों से गूँजने का रहस्य आज भी अनसुलझा है। कोई इसे तांत्रिक के श्राप से जोड़ता है, तो कोई ऐतिहासिक त्रासदी का परिणाम मानता है। आधुनिक तकनीक और विज्ञान भी इस किले की रातों के रहस्यमय पहलुओं को पूरी तरह समझाने में असमर्थ रहे हैं।जो भी हो, एक बात तो तय है—भानगढ़ एक ऐसा स्थान है जहाँ इतिहास, रहस्य और भय एक साथ साँस लेते हैं। हर रात जो दर्दनाक सिसकियाँ भानगढ़ की वीरान हवाओं में गूंजती हैं, वे एक खोए हुए युग की करुण पुकार बन गई हैं, जो अब भी अपनी सच्चाई कहने के लिए बेचैन हैं।

