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132 साल बाद लाइब्रेरी को लौटाई मैगजीन, लगने वाला था 11.5 लाख का फाइन, जानिए क्या हुआ?
 

132 साल बाद लाइब्रेरी को लौटाई मैगजीन, लगने वाला था 11.5 लाख का फाइन, जानिए क्या हुआ?

लाइब्रेरी से किताब या मैगजीन लेकर उसे समय पर वापस करना जरूरी होता है। लेकिन क्या हो अगर कोई व्यक्ति कोई मैगजीन लेकर 132 साल बाद उसे वापस करे? ऐसी ही एक हैरान करने वाली घटना इन दिनों चर्चा में है। एक पुरानी मैगजीन को उसके जारी होने के करीब 132 साल बाद लाइब्रेरी में वापस लौटाया गया। इतने लंबे समय तक मैगजीन वापस नहीं करने पर नियमों के हिसाब से उस पर लाखों रुपये का जुर्माना बन सकता था।

1890 के दशक में जारी हुई थी मैगजीन

रिपोर्ट के मुताबिक, यह मैगजीन 1890 के दशक में लाइब्रेरी से जारी की गई थी। उस समय लाइब्रेरी के सदस्यों के लिए तय नियमों के अनुसार सामग्री को निर्धारित अवधि में वापस करना होता था। लेकिन यह मैगजीन दशकों तक लाइब्रेरी से बाहर रही और आखिरकार 132 साल बाद वापस पहुंची।

मैगजीन की हालत और उसके इतने पुराने होने के कारण यह मामला लाइब्रेरी के लिए भी खास बन गया। जब इसके वापस आने की बात सामने आई तो लोगों के बीच भी इसकी चर्चा होने लगी।

11.5 लाख रुपये का बनता जुर्माना

अगर आज के हिसाब से पुराने नियमों के तहत लेट फीस की गणना की जाती, तो इस मैगजीन पर करीब 11.5 लाख रुपये का जुर्माना बन सकता था। 132 साल की देरी के कारण इतनी बड़ी रकम सुनकर ही लोग हैरान रह गए।

हालांकि, लाइब्रेरी ने इस मामले में भारी-भरकम जुर्माना वसूलने के बजाय मैगजीन की वापसी को ज्यादा महत्व दिया। इतने लंबे समय बाद ऐतिहासिक सामग्री का लाइब्रेरी तक वापस पहुंचना अपने आप में एक अनोखी घटना बन गया।

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