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धरती पर बन रहा है नया महासागर! अफ्रीका के दो हिस्सों में बंटने की संभावना, बदल सकता है दुनिया का नक्शा

धरती पर बन रहा है नया महासागर! अफ्रीका के दो हिस्सों में बंटने की संभावना, बदल सकता है दुनिया का नक्शा

धरती के अंदर चल रही भूगर्भीय हलचलें कई बार ऐसे बदलाव ला सकती हैं, जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अफ्रीका महाद्वीप के पूर्वी हिस्से में एक ऐसी ही बड़ी भूगर्भीय प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण भविष्य में वहां एक नया महासागर बन सकता है। इस घटना से अफ्रीकी महाद्वीप दो हिस्सों में बंट सकता है और दुनिया का नक्शा हमेशा के लिए बदल सकता है।

अफ्रीका में बन रही है विशाल दरार

वैज्ञानिकों के अनुसार, पूर्वी अफ्रीका में ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट (East African Rift) नाम की एक विशाल दरार धीरे-धीरे विकसित हो रही है। यह क्षेत्र धरती की टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण बन रहा है।

यह दरार करीब हजारों किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैली हुई है और इसमें धरती की सतह धीरे-धीरे अलग हो रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रक्रिया लाखों वर्षों में एक नए समुद्री क्षेत्र को जन्म दे सकती है।

अफ्रीका के अलग होने की संभावना

ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट के कारण अफ्रीकी प्लेट से एक छोटा हिस्सा धीरे-धीरे अलग हो रहा है। इसमें आज के समय के इथियोपिया, केन्या, तंजानिया और आसपास के इलाकों का बड़ा हिस्सा शामिल है।

अगर यह प्रक्रिया इसी तरह जारी रहती है, तो भविष्य में यह क्षेत्र मुख्य अफ्रीकी महाद्वीप से अलग होकर एक नया भू-भाग बना सकता है।

लाल सागर का पानी भर सकता है

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जब यह दरार पूरी तरह विकसित होगी और जमीन नीचे धंसने लगेगी, तो समुद्र का पानी इस नए क्षेत्र में प्रवेश कर सकता है।

ऐसी स्थिति में लाल सागर (Red Sea) और आसपास के समुद्री क्षेत्र का पानी यहां पहुंच सकता है, जिससे एक नया महासागर बनने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

भूगर्भीय बदलाव में लगेंगे लाखों साल

हालांकि, यह बदलाव तुरंत नहीं होने वाला है। वैज्ञानिकों के अनुसार, किसी नए महासागर के बनने की प्रक्रिया में लाखों साल लग सकते हैं।

धरती के इतिहास में पहले भी ऐसे बदलाव हो चुके हैं। करोड़ों साल पहले महाद्वीपों के अलग होने और जुड़ने की वजह से आज का भूगोल बना है।

धरती के बदलते स्वरूप का उदाहरण

यह घटना इस बात का उदाहरण है कि हमारी धरती एक स्थिर संरचना नहीं है, बल्कि लगातार बदल रही है। टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल, ज्वालामुखीय गतिविधियां और भूकंपीय घटनाएं समय के साथ धरती की सतह को नया आकार देती रहती हैं।

फिलहाल अफ्रीका में चल रही यह भूगर्भीय प्रक्रिया वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। आने वाले लाखों वर्षों में यह घटना धरती के नक्शे में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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