इंसान की पॉटी से बनेगा घर! वैज्ञानिकों ने खोजा अनोखा तरीका, कचरे से तैयार होगी निर्माण सामग्री
दुनिया में बढ़ते कचरे और पर्यावरण प्रदूषण के बीच वैज्ञानिक लगातार ऐसे नए तरीके खोज रहे हैं, जिनसे बेकार समझी जाने वाली चीजों का दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। इसी कड़ी में इंसानी मल यानी पॉटी से निर्माण सामग्री तैयार करने का विचार सामने आया है। सुनने में यह भले ही अजीब लगे, लेकिन वैज्ञानिक और शोधकर्ता जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं।
दरअसल, मानव मल में बड़ी मात्रा में जैविक पदार्थ मौजूद होते हैं। सामान्य परिस्थितियों में इसका निपटारा सीवेज ट्रीटमेंट और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए किया जाता है। लेकिन शोध का उद्देश्य इस कचरे को सुरक्षित तरीके से प्रोसेस करके ऐसे पदार्थ में बदलना है, जिसका उपयोग निर्माण क्षेत्र में किया जा सके।
कुछ शोध परियोजनाओं में मानव अपशिष्ट से प्राप्त सामग्री को ईंट या निर्माण सामग्री के साथ मिलाकर उसकी मजबूती और उपयोगिता का परीक्षण किया गया है। ऐसे प्रयोगों का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों की खपत कम करना और कचरे को दोबारा उपयोग में लाना है। यदि इस तरह की तकनीक सुरक्षित और व्यावहारिक साबित होती है, तो भविष्य में निर्माण उद्योग में इसके इस्तेमाल की संभावना तलाश की जा सकती है।
इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चरण अपशिष्ट का सुरक्षित उपचार है। बिना प्रोसेस किए मानव मल का इस्तेमाल निर्माण कार्य में करना स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसमें मौजूद रोगजनक सूक्ष्मजीव और अन्य हानिकारक तत्वों को उचित तकनीक के जरिए नियंत्रित या समाप्त करना जरूरी है।
वैज्ञानिकों की दिलचस्पी केवल मानव अपशिष्ट तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में कृषि अवशेष, खाद्य कचरा, प्लास्टिक और औद्योगिक अपशिष्ट को निर्माण सामग्री में बदलने पर भी शोध हो रहा है। इसका उद्देश्य कचरे को लैंडफिल में भेजने के बजाय उसे दोबारा इस्तेमाल करना और निर्माण में पारंपरिक संसाधनों पर निर्भरता कम करना है।
इस तरह की तकनीक के सामने कई चुनौतियां भी हैं। निर्माण सामग्री की मजबूती, लंबे समय तक टिकाऊपन, गंध, स्वास्थ्य सुरक्षा और बड़े पैमाने पर उत्पादन जैसे मुद्दों का समाधान करना जरूरी होगा। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सामग्री भवन निर्माण के निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा करे।
अगर इन चुनौतियों का समाधान हो जाता है तो जैविक कचरे से निर्माण सामग्री तैयार करना पर्यावरण के लिए उपयोगी विकल्प बन सकता है। इससे एक तरफ कचरे के निपटारे की समस्या कम हो सकती है, वहीं दूसरी ओर कुछ प्राकृतिक संसाधनों की मांग भी घट सकती है।
हालांकि, ‘इंसान की पॉटी से घर बनेगा’ कहना अभी इस क्षेत्र में चल रहे प्रयोगों को सरल भाषा में बताने वाला दावा है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा घर सीधे मानव मल से बनाया जाएगा। वास्तविक प्रक्रिया में उपचारित जैविक अपशिष्ट से प्राप्त सामग्री को अन्य निर्माण पदार्थों के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने की संभावना पर शोध किया जा रहा है।
भविष्य में अगर ये प्रयोग तकनीकी और सुरक्षा मानकों पर सफल साबित होते हैं, तो आज का असामान्य विचार पर्यावरण-अनुकूल निर्माण के एक नए विकल्प में बदल सकता है।

