Samachar Nama
×

रेगिस्तान के बीच मिट्टी से बना सदियों पुराना रहस्यमयी किला, यूनेस्को की धरोहर में शामिल, जानिए क्या है इतिहास?

रेगिस्तान के बीच मिट्टी से बना सदियों पुराना रहस्यमयी किला, यूनेस्को की धरोहर में शामिल, जानिए क्या है इतिहास?

रेगिस्तान का नाम सुनते ही आंखों के सामने दूर-दूर तक फैली रेत और तपता हुआ सूरज नजर आता है। लेकिन इसी रेगिस्तानी इलाके में एक ऐसा ऐतिहासिक किला भी मौजूद है, जो सदियों से अपने भीतर इतिहास, संस्कृति और स्थापत्य की अनगिनत कहानियां समेटे हुए है। यह है जैसलमेर का सोनार किला, जिसे दुनिया Jaisalmer Fort के नाम से जानती है। राजस्थान के थार रेगिस्तान में स्थित यह किला अपनी पीले बलुआ पत्थर की विशाल दीवारों और ऐतिहासिक महत्व के कारण बेहद खास है। इसे UNESCO ने Hill Forts of Rajasthan के तहत विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है।

रेगिस्तान के बीच क्यों खास है यह किला?

जैसलमेर का किला किसी सामान्य दुर्ग की तरह सिर्फ सैनिकों के रहने या दुश्मनों से बचाव के लिए नहीं बनाया गया था। UNESCO के अनुसार, यह रेगिस्तानी इलाके में विकसित एक ऐसा पहाड़ी किला है, जिसके भीतर शुरुआत से ही पूरा शहरी इलाका मौजूद रहा। आज भी किले के अंदर आबादी, मंदिर और ऐतिहासिक इमारतें देखी जा सकती हैं।

किले की सबसे खास पहचान इसकी सुनहरी-पीली पत्थर की दीवारें हैं। सूरज की रोशनी पड़ने पर ये दीवारें सुनहरे रंग की दिखाई देती हैं। यही वजह है कि इसे सोनार किला या गोल्डन फोर्ट भी कहा जाता है।

व्यापारिक रास्ते पर बना था किला

जैसलमेर का इलाका पुराने समय में महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों से जुड़ा हुआ था। रेगिस्तानी रास्तों से गुजरने वाले व्यापारियों और कारवां के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था। किले के भीतर व्यापारिक गतिविधियों और बस्तियों का विकास भी हुआ।

UNESCO के अनुसार, राजस्थान के छह पहाड़ी किले राजपूत रियासतों की राजनीतिक शक्ति और स्थापत्य परंपरा के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। इनमें जैसलमेर का किला रेगिस्तानी भू-दृश्य के अनुरूप विकसित किले का उत्कृष्ट उदाहरण है।

किले के अंदर आज भी बसी है जिंदगी

इस किले की एक खास बात यह है कि यह केवल पुराना स्मारक बनकर नहीं रह गया है। इसके भीतर आज भी लोग रहते हैं। किले के अंदर ऐतिहासिक जैन मंदिरों समेत कई महत्वपूर्ण धार्मिक और स्थापत्य अवशेष मौजूद हैं। UNESCO ने भी किले के भीतर मौजूद जीवंत शहरी बस्ती और मंदिर समूह को इसकी विशिष्टता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।

UNESCO की विश्व धरोहर सूची में कब शामिल हुआ?

2013 में जैसलमेर किले को ‘Hill Forts of Rajasthan’ के छह किलों के समूह के साथ UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इस समूह में चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, गागरोन और आमेर के किले भी शामिल हैं।

UNESCO के मुताबिक इन किलों में राजपूत शासकों की सैन्य रणनीति, स्थापत्य कला, धार्मिक परंपराओं और शहरी जीवन की झलक मिलती है। जैसलमेर किला इस पूरी श्रृंखला में इसलिए अलग पहचान रखता है क्योंकि यह सीधे रेगिस्तानी भू-दृश्य के साथ जुड़ा हुआ है।

सदियों बाद भी कायम है आकर्षण

आज जैसलमेर का यह किला देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण है। रेगिस्तान के बीच इसकी विशाल दीवारें और सुनहरा रंग इसे बेहद खूबसूरत बनाते हैं। किले की वास्तुकला में सुरक्षा व्यवस्था के साथ धार्मिक और सामाजिक जीवन की झलक भी दिखाई देती है।

यही कारण है कि जैसलमेर का सोनार किला सिर्फ पत्थरों से बना एक पुराना दुर्ग नहीं, बल्कि राजस्थान के राजपूत इतिहास, व्यापारिक विरासत और रेगिस्तानी जीवन का जीवंत दस्तावेज है। UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर भी मान्यता मिली है।

Share this story

Tags