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देश के 8.7 करोड़ युवा न पढ़ाई में, न नौकरी में! NEET आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, सोशल मीडिया पर उठे रोजगार के सवाल
 

देश के 8.7 करोड़ युवा न पढ़ाई में, न नौकरी में! NEET आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, सोशल मीडिया पर उठे रोजगार के सवाल


नई दिल्ली: देश में युवाओं की शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। नीति आयोग से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि भारत में करीब 8.7 करोड़ युवा NEET कैटेगरी में आते हैं। NEET का मतलब है—Not in Education, Employment or Training, यानी ऐसे युवा जो फिलहाल न तो शिक्षा हासिल कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी औपचारिक प्रशिक्षण में शामिल हैं।

हालांकि, NEET आंकड़े को यह मान लेना सही नहीं है कि ये सभी युवा काम नहीं करना चाहते या रोजगार के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। इस श्रेणी में अलग-अलग परिस्थितियों में रहने वाले युवा शामिल हो सकते हैं।

आखिर NEET कैटेगरी क्या बताती है?

NEET एक सांख्यिकीय श्रेणी है, जिसका इस्तेमाल यह समझने के लिए किया जाता है कि कितने युवा किसी समय शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर हैं।

इसमें बेरोजगार युवा तो शामिल हो सकते हैं, लेकिन इसके अलावा ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो नौकरी तलाश रहे हों, घरेलू जिम्मेदारियों में लगे हों या किसी अन्य कारण से शिक्षा और औपचारिक रोजगार से बाहर हों।

यही वजह है कि NEET के आंकड़े को सीधे तौर पर युवाओं की काम करने की इच्छा से जोड़ना सही तस्वीर नहीं देता।

8.7 करोड़ का आंकड़ा क्यों चर्चा में है?

सोशल मीडिया पर सामने आए दावे में 8.7 करोड़ युवाओं का आंकड़ा देकर सवाल उठाया जा रहा है कि इतनी बड़ी युवा आबादी शिक्षा, रोजगार या ट्रेनिंग से बाहर क्यों है।

भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। ऐसे में बड़ी संख्या में युवाओं का औपचारिक शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से बाहर रहना अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा है।

अगर युवा अपनी क्षमता के अनुरूप शिक्षा और रोजगार के अवसर हासिल नहीं कर पाते, तो इसका असर उनकी आय, कौशल विकास और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं पर पड़ सकता है।

'कुछ नहीं कर रहे' कहना कितना सही?


NEET आंकड़ों को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि NEET का अर्थ 'कुछ नहीं करना' नहीं है।

उदाहरण के लिए, कोई युवा नौकरी की तलाश कर रहा हो लेकिन उसे रोजगार नहीं मिला हो, तो वह NEET श्रेणी में आ सकता है। इसी तरह कुछ युवा घरेलू काम या देखभाल की जिम्मेदारियों के कारण शिक्षा और रोजगार से बाहर हो सकते हैं।

इसलिए इस आंकड़े को समझते समय यह देखना जरूरी है कि NEET युवाओं में कितने लोग सक्रिय रूप से नौकरी खोज रहे हैं, कितने घरेलू जिम्मेदारियों में हैं और कितने अन्य कारणों से शिक्षा या रोजगार से बाहर हैं।

असली चुनौती है अवसर और कौशल

भारत की बड़ी युवा आबादी देश के लिए एक बड़ी ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर जरूरी हैं।

युवाओं को केवल नौकरी उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें बाजार की जरूरत के मुताबिक कौशल देना, करियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

सोशल मीडिया पर चल रही बहस

8.7 करोड़ NEET युवाओं के आंकड़े को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे देश में रोजगार और कौशल की चुनौती से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ लोग NEET की परिभाषा को लेकर गलत धारणाओं को दूर करने की बात कर रहे हैं।

ऐसे में किसी वायरल पोस्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि करोड़ों युवा जानबूझकर काम या पढ़ाई से दूर हैं, सही नहीं होगा। आंकड़ों के पीछे की वजहों को समझना ही इस समस्या की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकता है।

भारत के लिए चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि कितने युवा NEET श्रेणी में हैं, बल्कि यह भी समझना है कि वे इस स्थिति में क्यों हैं और उन्हें शिक्षा, कौशल तथा सम्मानजनक रोजगार की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

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