Samachar Nama
×

जीते जी कराया अपना मृत्यु भोज: 60 वर्षीय बुजुर्ग ने 7000 लोगों को खिलाया खाना, बोले- ‘अब सुकून से मर सकूंगा’

जीते जी कराया अपना मृत्यु भोज: 60 वर्षीय बुजुर्ग ने 7000 लोगों को खिलाया खाना, बोले- ‘अब सुकून से मर सकूंगा’

मध्य प्रदेश के Shivpuri से एक बेहद अनोखा और भावुक मामला सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान भी किया और सोचने पर मजबूर भी। यहां 60 वर्षीय अविवाहित बुजुर्ग Kalyan Pal ने अपने जीते जी खुद का मृत्यु भोज करा दिया।

बुजुर्ग की चिंता यह थी कि उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार और कर्मकांड करने वाला कोई नहीं है। इसी चिंता के चलते उन्होंने ऐसा कदम उठाया, जिसकी अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।

प्रयागराज जाकर खुद कराया कर्मकांड

जानकारी के मुताबिक कल्याण पाल अविवाहित हैं और उनका कोई नजदीकी वारिस नहीं है। उन्हें हमेशा यह डर सताता था कि मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार और धार्मिक रस्में कौन निभाएगा।

इसी वजह से उन्होंने पहले Prayagraj जाकर अपने नाम से कर्मकांड और धार्मिक अनुष्ठान करवाए। इसके बाद गांव लौटकर उन्होंने मृत्यु भोज आयोजित करने का फैसला लिया।

7000 लोगों को कराया भंडारा

कल्याण पाल ने गांव और आसपास के इलाकों में बाकायदा निमंत्रण कार्ड बांटे और बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन किया। बताया जा रहा है कि इस आयोजन में करीब 7000 लोगों ने भोजन किया।

भंडारे में शामिल लोगों के लिए पूरी व्यवस्था की गई थी। गांव के लोग भी इस अनोखे आयोजन को देखकर हैरान रह गए।

बोले- अब चैन से मर सकूंगा

बुजुर्ग ने कहा कि वह लंबे समय से इस चिंता में जी रहे थे कि उनके जाने के बाद कोई उनका कर्मकांड नहीं करेगा। अब जब उन्होंने जीते जी सब कुछ कर लिया है, तो उन्हें मानसिक शांति मिल गई है।

उन्होंने भावुक होकर कहा, “अब मुझे किसी बात की चिंता नहीं है। मैं सुकून से मर सकूंगा।”

सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी

कल्याण पाल की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इसे “अजब-गजब” घटना तो बता ही रहे हैं, साथ ही कई लोग इसे अकेलेपन और सामाजिक बदलाव से जोड़कर भी देख रहे हैं।

कुछ यूजर्स ने बुजुर्ग की सोच को भावुक कर देने वाला बताया, जबकि कई लोगों ने कहा कि यह घटना समाज में बदलते पारिवारिक ढांचे और बुजुर्गों की स्थिति को भी दिखाती है।

लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही घटना

यह अनोखा मामला लोगों को कई सवालों पर सोचने के लिए मजबूर कर रहा है। एक तरफ जहां इसे परंपरा और आस्था से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह बुजुर्गों के अकेलेपन की गंभीर तस्वीर भी सामने लाता है।

फिलहाल शिवपुरी के इस अनोखे “जीते जी मृत्यु भोज” की चर्चा दूर-दूर तक हो रही है और लोग इसे शायद लंबे समय तक याद रखेंगे।

Share this story

Tags