ट्रेन में 5 घंटे का 'टॉर्चर'... BJP सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी बोलीं- 'भगवान ही बचाए इस देश को'
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी और कर्नाटक की गायिका शिवश्री स्कंदप्रसाद ने अपनी एक ट्रेन यात्रा का अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया है। उन्होंने इस सफर को बेहद परेशान करने वाला बताया। शिवश्री के मुताबिक, ट्रेन के एक कोच में करीब 40 लोगों का समूह लगभग पांच घंटे तक लगातार तेज आवाज में बातें और हंसी-मजाक करता रहा। उनका कहना है कि इससे दूसरे यात्रियों को काफी परेशानी हुई। उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर लोगों के व्यवहार और सिविक सेंस को लेकर भी सवाल उठाए।
56 सीटों वाले कोच में 40 लोगों का ग्रुप
शिवश्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उनकी ट्रेन यात्रा काफी खराब रही। उनके मुताबिक, 56 सीटों वाले कोच में करीब 40 अधेड़ उम्र के लोगों का एक समूह मौजूद था। यह समूह पूरे करीब पांच घंटे तक लगातार ऊंची आवाज में बात करता रहा और हंसी-मजाक करता रहा।
उन्होंने कहा कि एक कलाकार के तौर पर उन्हें शांति और सुकून में रहना पसंद है, क्योंकि उनके दिमाग में लगातार कई विचार चलते रहते हैं। ऐसे में लगातार तेज आवाज में बातचीत होने के कारण उनके लिए सफर करना मुश्किल हो गया।
दूसरे कोच में सीट मांगने पर भी नहीं मिली जगह
शिवश्री के मुताबिक, उन्होंने इस परेशानी के बारे में टिकट परीक्षक यानी TTE को बताया और दूसरे कोच में सीट देने का अनुरोध किया। हालांकि ट्रेन पूरी तरह भरी होने के कारण उन्हें दूसरे कोच में जगह नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्हें उसी कोच में रहना पड़ा और उन्होंने अपनी सीट बदल ली।
शिवश्री ने बताया कि इसके बाद करीब आठ लोगों का एक समूह UNO खेलने लगा। उनके मुताबिक, ये लोग पहले से ही लगातार बातें और हंसी-मजाक कर रहे थे। उन्होंने दोबारा TTE से शिकायत की। TTE ने उन लोगों से गेम बंद करने के लिए कहा और उन्होंने तत्काल ऐसा कर दिया।
TTE के जाने के बाद फिर शुरू हुआ शोर
शिवश्री के अनुसार, कुछ देर बाद TTE दोबारा वहां आए और कथित तौर पर उनसे पूछा कि वे इतना शोर क्यों कर रहे हैं। इस पर ग्रुप के लोगों ने हंसी-मजाक किया और TTE को भी अपने साथ गेम खेलने के लिए कह दिया। शिवश्री का दावा है कि इसके बाद समूह ने जानबूझकर बॉलीवुड के गाने गाना शुरू कर दिया।
'सिविक सेंस के इस खेल में हम सब हार गए'
शिवश्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि कौन जीता या कौन हारा, बल्कि सवाल सार्वजनिक जगहों पर दूसरों के प्रति जिम्मेदारी और व्यवहार का है। उन्होंने लिखा कि एक बड़े समूह के सामने बाकी यात्रियों से अक्सर चुपचाप सब कुछ सहने की उम्मीद की जाती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि देश में सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के व्यवहार में सुधार कब आएगा। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, "भगवान ही इस देश को बचाए।" उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
शिवश्री की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों के व्यवहार, तेज आवाज में बातचीत और दूसरे यात्रियों की सुविधा का सम्मान करने को लेकर बहस शुरू हो गई है। यह पूरा मामला शिवश्री द्वारा साझा किए गए उनके व्यक्तिगत अनुभव और दावों पर आधारित है।

