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पितरों का पिंडदान करने रूस से गया पहुंचीं 5 लड़कियां, देवघाट पर किया तर्पण, बोलीं- ‘जीवन धन्य हो गया’

पितरों का पिंडदान करने रूस से गया पहुंचीं 5 लड़कियां, देवघाट पर किया तर्पण, बोलीं- ‘जीवन धन्य हो गया’

बिहार के गया में पितरों के पिंडदान और तर्पण के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी कड़ी में रूस से आईं पांच युवतियां इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने गया के देवघाट पर पहुंचकर अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की। भारतीय परंपराओं और सनातन संस्कृति के प्रति उनकी आस्था ने स्थानीय लोगों का भी ध्यान खींचा।

रूस से गया पहुंची इन पांचों युवतियों ने धार्मिक विधि-विधान के साथ अपने पितरों को याद किया। उन्होंने फल्गु नदी के तट पर स्थित देवघाट पर पंडितों की देखरेख में तर्पण और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान उन्होंने भारतीय धार्मिक परंपराओं के बारे में जानकारी भी ली और विधि के अनुसार पूजा-अर्चना की।

पितरों के प्रति श्रद्धा लेकर पहुंचीं गया

गया को पितृपक्ष के दौरान पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। मान्यता है कि यहां फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। यही धार्मिक मान्यता रूस से आई इन युवतियों को भी गया तक लेकर आई।

उन्होंने बताया कि भारत की धार्मिक परंपराओं के बारे में उन्होंने पहले से काफी कुछ सुना था। गया में पिंडदान की परंपरा और पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांड के बारे में जानने के बाद उन्होंने खुद यहां आकर इसे करने का निर्णय लिया।

देवघाट पर विधि-विधान से किया तर्पण

देवघाट पर पहुंचने के बाद पांचों युवतियों ने पंडितों के मार्गदर्शन में तर्पण किया। पिंडदान की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने अपने पूर्वजों को याद किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद उनके चेहरे पर संतोष और भावुकता नजर आई।

इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति और यहां की धार्मिक परंपराओं को करीब से समझने की कोशिश की। पूजा की अलग-अलग विधियों के बारे में उन्होंने पंडितों से जानकारी ली और कर्मकांड में शामिल सामग्री तथा उसके महत्व को भी समझा।

कहा- ‘जीवन धन्य हो गया’

धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद रूस से आई युवतियों ने अपने अनुभव को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि गया आकर पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करने का अनुभव उनके लिए यादगार रहा। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यहां आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ और उनका जीवन धन्य हो गया।

उनका यह अनुभव बताता है कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में विदेशों के लोगों की भी रुचि बढ़ रही है। खासकर गया, वाराणसी और हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों पर विदेशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी अक्सर देखने को मिलती है।

विदेशी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण बना गया

गया लंबे समय से पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। पितृपक्ष के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और गया के विभिन्न धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं।

रूस से आईं पांच युवतियों का गया पहुंचकर पितरों का तर्पण करना इसी धार्मिक और आध्यात्मिक आकर्षण की एक झलक है। देवघाट पर अनुष्ठान पूरा करने के बाद उनका ‘जीवन धन्य हो गया’ कहना इस यात्रा को और खास बना रहा है।

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