300 साल पुराना बरगद: नल्लामाला जंगल में मिला विशाल ‘महावृक्ष’, 7 पीढ़ियों से हो रही है पूजा
आंध्र प्रदेश के नल्लामाला वन क्षेत्र के पलुतला गांव में एक अत्यंत प्राचीन और विशाल बरगद का पेड़ (उदलमरी) मिला है, जिसकी उम्र लगभग 300 साल बताई जा रही है। यह खोज पुरातत्व विभाग के हालिया सर्वे के दौरान सामने आई है, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी हैरान कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, यह महावृक्ष करीब 100 फीट ऊंचा और लगभग 40 फीट चौड़े विशाल तने वाला है, जो इसे अपने आप में एक प्राकृतिक अजूबा बनाता है। इसकी विशालता इतनी अधिक है कि दूर से देखने पर यह किसी छोटे जंगल जैसा प्रतीत होता है।
स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए यह बरगद केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का केंद्र है। गांव के लोग पिछले लगभग 7 पीढ़ियों से इस वृक्ष के नीचे अपने ग्राम देवता की पूजा करते आ रहे हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ग्रामीणों का मानना है कि यह पेड़ उनके पूर्वजों की आस्था और संरक्षण का प्रतीक है, जिसके नीचे आज भी पारंपरिक रीति-रिवाज और अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। समय के साथ यह स्थान एक पवित्र स्थल के रूप में विकसित हो गया है।
पुरातत्व विभाग और वन विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के प्राचीन बरगद के पेड़ न केवल जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ये पेड़ हजारों जीव-जंतुओं को आश्रय और भोजन उपलब्ध कराते हैं।
इस विशाल बरगद की खोज के बाद यह क्षेत्र अब पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। लोग दूर-दूर से इस प्राकृतिक अजूबे को देखने पहुंच रहे हैं और इसकी भव्यता को कैमरे में कैद कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे प्राचीन वृक्षों का संरक्षण बेहद जरूरी है, क्योंकि ये न केवल पर्यावरणीय धरोहर हैं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी हिस्सा होते हैं।
फिलहाल यह 300 साल पुराना बरगद का पेड़ अपनी विशालता, धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता के कारण चर्चा में है और इसे प्रकृति की अनमोल धरोहर के रूप में देखा जा रहा है।

