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स्विट्जरलैंड में दफनाई 2000 'सफेद' चड्डियां, मिट्टी की हेल्थ जांचना चाहते थे वैज्ञानिक; बोले- नया राज खुल गया

स्विट्जरलैंड में दफनाई 2000 'सफेद' चड्डियां, मिट्टी की हेल्थ जांचना चाहते थे वैज्ञानिक; बोले- नया राज खुल गया

मिट्टी की सेहत जांचने के लिए वैज्ञानिकों ने स्विट्जरलैंड में एक ऐसा प्रयोग किया, जिसके बारे में सुनकर शायद आप भी हैरान रह जाएं। यहां वैज्ञानिकों ने करीब 2000 सफेद सूती अंडरवियर को खेतों की मिट्टी में दफनाया। सुनने में यह प्रयोग भले ही अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे मिट्टी में मौजूद जीवों और जैविक गतिविधि का पता लगाने का वैज्ञानिक उद्देश्य था।

वैज्ञानिकों का मानना था कि मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव और दूसरे जीव जैविक पदार्थों को कितनी तेजी से तोड़ते हैं, इससे मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इसी विचार के आधार पर सफेद सूती चड्डियों को एक तरह के जैविक संकेतक के रूप में इस्तेमाल किया गया।

प्रयोग के दौरान सूती अंडरवियर को अलग-अलग इलाकों की मिट्टी में दफनाया गया। कुछ समय बाद इन्हें वापस निकालकर उनकी स्थिति का अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने देखा कि जिन कपड़ों पर ज्यादा जैविक क्षरण हुआ था, वहां मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि अधिक थी। इसके विपरीत, जिन कपड़ों में कम बदलाव दिखाई दिया, वहां जैविक गतिविधि अपेक्षाकृत कम मानी गई।

दरअसल, शुद्ध या मुख्य रूप से सूती कपड़ा मिट्टी में मौजूद जीवों के लिए जैविक पदार्थ का स्रोत बन सकता है। जैसे-जैसे सूक्ष्मजीव कपड़े के रेशों को तोड़ते हैं, कपड़ा कमजोर होने लगता है। वैज्ञानिक इसी प्रक्रिया को देखकर यह समझने की कोशिश करते हैं कि मिट्टी के अंदर जैविक गतिविधि कितनी सक्रिय है।

इस प्रयोग का उद्देश्य केवल यह पता लगाना नहीं था कि मिट्टी में जीव मौजूद हैं या नहीं। वैज्ञानिक इससे अलग-अलग कृषि क्षेत्रों और प्राकृतिक इलाकों की मिट्टी के बीच अंतर भी समझना चाहते थे। मिट्टी की गुणवत्ता का सीधा संबंध खेती, पौधों की वृद्धि और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र से होता है।

इस तरह के प्रयोगों की खासियत यह है कि इन्हें अपेक्षाकृत आसान तरीके से किया जा सकता है। महंगे और जटिल उपकरणों के बजाय एक सामान्य सूती कपड़े के जरिए भी मिट्टी की जैविक गतिविधि का एक संकेत मिल सकता है। हालांकि, अंडरवियर के क्षरण से मिली जानकारी को मिट्टी की सेहत का अकेला पैमाना नहीं माना जा सकता। वैज्ञानिकों को इसके साथ मिट्टी के दूसरे परीक्षण भी करने पड़ते हैं।

स्विट्जरलैंड में किया गया यह प्रयोग लोगों के लिए इसलिए भी दिलचस्प बन गया क्योंकि आमतौर पर मिट्टी की जांच के लिए वैज्ञानिक नमूने लेकर प्रयोगशाला में उनका परीक्षण करते हैं। लेकिन यहां कपड़े को ही मिट्टी में छोड़कर प्रकृति की प्रक्रिया को सीधे देखने का तरीका अपनाया गया।

सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इस प्रयोग की चर्चा के बाद लोगों ने इसे वैज्ञानिक सोच का अनोखा उदाहरण बताया। कई लोगों को शुरुआत में यह समझना मुश्किल लगा कि आखिर अंडरवियर को मिट्टी में दफनाने से मिट्टी की सेहत का पता कैसे चल सकता है। लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक कपड़े के प्राकृतिक रूप से टूटने की प्रक्रिया मिट्टी के अंदर मौजूद जैविक गतिविधि का संकेत दे सकती है।

इस प्रयोग से सामने आया संदेश यही है कि वैज्ञानिक शोध हमेशा पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं होता। कभी-कभी रोजमर्रा की किसी सामान्य वस्तु का इस्तेमाल भी पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजने में किया जा सकता है। स्विट्जरलैंड का यह 'अंडरवियर प्रयोग' इसी वजह से विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन की दुनिया में खासा दिलचस्प उदाहरण बन गया है।

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