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15000 साल पहले भूख लगने पर जहरीले सांपों और छिपकलियों को कच्चा चबा जाते थे इंसान : रिसर्च

15000 साल पहले भूख लगने पर जहरीले सांपों और छिपकलियों को कच्चा चबा जाते थे इंसान : रिसर्च

आज इंसान खाने को लेकर स्वाद, पोषण और साफ-सफाई का खास ध्यान रखता है, लेकिन हजारों साल पहले परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं। उस दौर में इंसानों के लिए भोजन जुटाना सबसे बड़ी चुनौती हुआ करता था। अब एक रिसर्च में प्राचीन मानवों के खान-पान से जुड़ी ऐसी जानकारी सामने आई है, जो आपको हैरान कर सकती है।

शोध के अनुसार, करीब 15 हजार साल पहले इंसान भोजन की तलाश में कई तरह के जंगली जीवों का शिकार करते थे। इनमें सांप और छिपकलियां भी शामिल थीं। माना जाता है कि भोजन की कमी होने पर इंसान ऐसे जीवों को भी खाने से पीछे नहीं हटते थे, जिन्हें आज खतरनाक या जहरीला माना जाता है।

पुरातात्विक स्थलों से मिले जानवरों की हड्डियों और दूसरे अवशेषों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को प्राचीन मानवों के आहार के बारे में जानकारी मिलती है। हड्डियों पर कटने, जलने या मांस अलग किए जाने के निशान इस बात का संकेत दे सकते हैं कि उनका इस्तेमाल भोजन के लिए किया गया था।

वैज्ञानिकों के लिए यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि उस समय इंसान अपने आसपास उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों पर काफी हद तक निर्भर थे। जंगलों और खुले इलाकों में रहने वाले समुदाय शिकार, मछली पकड़ने और जंगली पौधों से भोजन जुटाते थे। ऐसे में भोजन के विकल्प आज की तुलना में बेहद सीमित थे।

जहरीले सांपों को खाने की बात सुनकर भले ही आज हैरानी हो, लेकिन कई सांपों के विष का खतरा मुख्य रूप से उनके काटने से जुड़ा होता है। उचित तरीके से पकाने पर कुछ प्रजातियों का मांस खाने योग्य हो सकता है। हालांकि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्राचीन इंसान हर बार सांप या छिपकली को कच्चा ही खाते थे।

शोध में सामने आए संकेत प्राचीन मानवों के खान-पान और उनके वातावरण के साथ संबंध को समझने में मदद करते हैं। उस समय भोजन हासिल करने के लिए उन्हें अपने आसपास मौजूद हर संभावित स्रोत का इस्तेमाल करना पड़ता था।

आज के समय में इंसानों के पास भोजन के अनगिनत विकल्प हैं और खाद्य सुरक्षा के लिए कई नियम मौजूद हैं। लेकिन हजारों साल पहले जीवन काफी कठिन था। यही वजह है कि पुरातात्विक खोजें हमें यह समझने का मौका देती हैं कि हमारे पूर्वजों ने बदलते वातावरण और भोजन की चुनौतियों के बीच किस तरह जीवन बिताया।

हालांकि किसी भी प्राचीन खान-पान से जुड़ी रिसर्च के निष्कर्षों को समझते समय यह देखना जरूरी है कि वैज्ञानिकों ने किस स्थान, किस अवशेष और किस प्रमाण के आधार पर निष्कर्ष निकाला है। फिर भी 15 हजार साल पुराने मानव आहार की यह कहानी हमारे पूर्वजों की जीवनशैली की एक बेहद दिलचस्प झलक जरूर पेश करती है।

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