शमी के पत्तों को हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है और इसे मुख्य रूप से भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि शमी पत्तियां भगवान शिव को अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
शिवपुराण की मानें तो शमी के पौधे के पत्तों को यदि शिव पूजन में सम्मलित किया जाए तो भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
शमी का पौधा मुख्य रूप से शनि देव का पौधा माना जाता है और इसे घर में लगाने से शनि देव की कृपा तो प्राप्त होती ही है। ये पौधा भगवान् शिव को भी अत्यंत प्रिय है और कहा जाता है कि जिस घर में शमी का पौधा होता है वहां भगवान् शिव का वास होता है और शनि की बुरी दृष्टि नहीं पड़ती है।
शमी के पेड़ को घर में लगाने के साथ ही आपके जीवन में सुख समृद्धि बढ़ती है और आर्थिक तंगी दूर होती है। ऐसे में आपके पास अधिक जगह नहीं है तो गमले में भी शमी का पौधा लगा सकती हैं।
शमी की पत्तियों को राक्षस त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसकी पत्तियां राक्षस के तीन सिरों से मिलती जुलती हैं, जिन्हें शिवजी ने युद्ध के दौरान काट दिया था। तभी से मान्यता है कि भगवान शिव को शमी के पत्ते चढ़ाना उनके प्रति भक्ति दिखाने का एक तरीका है।
एक पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत युद्ध से पहले, पांडवों ने अपने हथियार शमी के पेड़ को सौंप दिए और जीत के लिए उस पेड़ से पूजा की। तभी से शमी के वृक्ष की पूजा किसी भी जगह विजय प्राप्त करने के लिए की जाने लगी
रामायण में उल्लेख है कि जब भगवान राम ने लंका पर युद्ध के पूर्व विजय मुहूर्त में हवन किया था तो शमी का वृक्ष इसका साक्षी बना था और भगवान श्री राम ने भी लंका पर आक्रमण करने से पहले इस पौधे की पूजा की थी
सावन के महीनें में शिवजी की जब भी पूजन करें तो बेलपत्र के साथ शमी के फूल और पत्र दोनों ही जरूर चढ़ाएं। भगवान शिव को शमी बहुत प्रिय है इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए शिव पूजन में जरूर अर्पित करें
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