तमिलनाडु की सांस्कृतिक राजधानी मदुरै में वैसे तो कई मंदिर हैं। इन मंदिरों को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। लेकिन वास्तुकला और प्राचीन कथाओं के लिए यहां एक ही मंदिर फेमस है जिसका नाम मीनाक्षी मंदिर है। आइए, इस मंदिर से जुड़ा इतिहास आपको बताते हैं
ये मंदिर वैगई नदी के दक्षिणी तट पर स्थि है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव सुंदरेश्वर रूप में राजा मलयध्वज की पुत्री यानि पार्वती (मीनाक्षी) से विवाह करने आए थे।
इस मंदिर का इतिहास लगभग 7वीं शताब्दी से भी प्राचीन माना जाता है। साल 1560 से लेकर 1655 के बीच इस मंदिर में कई बार परिवर्तन किए गए हैं।
इस मंदिर में 40 मीटर ऊंचे 12 प्रवेश द्वार हैं। इन द्वार पर देवी-देवताओं के अद्बुत चित्र बनए हुए हैं। मंदिर में 14 गोपुरम और 985 स्तंभ भी हैं।
देवी मीनाक्षी 3 स्तनों के साथ पैदा हुई थीं।उन्हें आशीर्वाद मिला था की सही आदमी से मिलने के बाद उनका तीसरा स्तन गायब हो जाएगा। भगवान सुंदरेश्वर से मिलने के बाद उनका तीसरा स्तन गायब हो गया था।
मां पार्वती के मीनाक्षी स्वरूप इस मंदिर का अर्थ है जिसकी मछली यानी मीन के समान हो। माता मीनाक्षी भगवान शिव की पत्नी पार्वती का अवतार और विष्णु जी की बहन हैं।
इस मंदिर को अमीर मंदिरों में से एक गिना जाता है। इसका मुख्य गर्भगृह 3500 सालों से भी ज्यादा पुराना है। इसकी चर्च तमिल साहित्यों में की गई है।
कथाओं के अनुसार, जब सांवली महिलाएं चेहरे पर हल्दी लगाती थीं तो उनका रंग हरा हो जाता था। इस वजह से मीनाक्षी देवी को हरे रंग का दिखाया गया है।
अगर आप भी तमिलनाडु जाने का प्लान बनाते हैं, तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करें और इसकी रोचक कथा के बारे में जानें। स्टोरी अच्छी लगी हो तो लाइक और शेयर करें।