हिंदू धर्म में शेषनाग, वासुकि नाग, कालिया नाग आदि नागों का वर्णन मिलता है। इन सभी नागों में से शेषनाग सबसे उच्च स्थान पर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शेषनाग की उत्पत्ति कैसे हुई थी और वह किसके अवतार हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्माजी के मानव पुत्र प्रजापति कश्यप की दो पत्नियां थी। जिनका नाम कद्रू और विनिता था। माना जाता है कि कद्रू ने नागों को जन्म दिया और विनिता ने पक्षयिों को।
प्रजापति कश्यप की पहली पत्नी कद्र विनिता से ईर्ष्या करती थी। कहा जाता है कि उन्होंने एक क्रीडा में विनिता को छल से हरा दिया और उन्हें दासी बना लिया।
शेषनाग इस दृश्य को देखकर काफी दुखी हुए कि उनके भाइयों और मौसी के साथ छल किया गया है। जिसकी वजह से उन्होंने अपनी मां और भाईयों का साथ छोड़ दिया।
इस घटना के बाद शेषनाग गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने चले गए। वहां उन्होंने कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रश्न होकर ब्रह्माजी प्रकट हुए।
ब्रह्माजी ने शेषनाग की तपस्या से खुश होकर उन्हें यह वरदान दिया कि वह अपनी बुद्धि धर्म से कभी विचलित नहीं होंगे।
शेषनाग जब क्षीरसागर पहुंचे, तो वहां उन्होंने भगवान विष्णु के शयन की सेवा की। जिसके बाद भगवान विष्णु ने उन्हें पूरे पृथ्वी की भार उठाने को कहा।
ग्रंथों के अनुसार शेषनाग ने त्रेतायुग में लक्ष्मण के रूप में जन्म लिया। इसके बाद द्वापर युक में वह बलरामजी के रूप में अवतरित हुए।