Republic Day क्यों मनाया जाता है 26 जनवरी को ही

जानिए इसका इतिहास और महत्व

74वां गणतंत्र दिवस

इस साल देश अपना 74वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है लेकिन क्या आपको पता है कि देश को गणतंत्र घोषित करने के लिए 26 जनवरी की तारीख को ही क्यों चुना गया।

संविधान की ज़रूरत

अगर हम इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो यह पाते हैं कि देश के अपने संविधान की जरूरत लोगों को कहीं पहले नज़र आ गई थी।

बाल गंगाधरतिलक ने उठाई मांग

पहली बार संविधान सभा की मांग साल 1895 में बाल गंगाधरतिलक ने उठाई थी।

​कई दस्तावेजों में जिक्र

1928 की नेहरू रिपोर्ट ,1935 का भारत शासन अधिनियम और कई अन्य दस्तावेजों ने भी संविधान की आवश्यकता को रेखांकित किया।

कामनवेल्थ ऑफ इण्डिया बिल

1925 में महात्मा गांधी की अध्यक्षता में कामनवेल्थ ऑफ इण्डिया बिल प्रस्तुत किया गया। यह भारत के लिए संवैधानिक प्रणाली की रूपरेखा प्रस्तुत करने का पहला प्रयास था।

6 दिसंबर 1946

देश के नियमों और कानूनों को बनाने के लिए 6 दिसम्बर 1946 को संविधान सभा की स्थापना हुई। जिसने दो साल ग्यारह महीने और 18 दिन में देश का संविधान बनाकर तैयार कर दिया।

11 दिसंबर 1946

राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष और हरेंद्र कुमार मुखर्जी उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए।

​26 नवंबर 1949

संविधान सभा ने भारतीय संविधान को स्वीकार किया और उसके कुछ धाराओं को लागू भी किया गया।

1950 में संविधान लागू

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 में बनकर तरह तैयार हो चुका था। हालांकि, 26 जनवरी की महत्ता को देखते हुए इसी दिन साल 1950 में संविधान लागू किया गया।

26 जनवरी का महत्व

दरअसल, 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव लागू होने की इस तारीख को महत्व देने के लिए ही 26 जनवरी का दिन संविधान लागू करने के लिए चुना गया था।

26 जनवरी 1950

यह संविधान देश में पूरी तरह से लागू कर दिया गया। इस वजह से हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।