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Kanpur 12 मिनट में विज्ञापन नीति और स्ट्रीट लाइट प्रस्ताव पास, अब 110 वार्डों में पार्षद लगवा पाएंगे 10-10 लाइट
 

After Smriti Mandhana, Harmanpreet Kaur, Shefali Verma also did away with The Hundred, due to which the Indian opener left
 उत्तर प्रदेश न्यूज़ डेस्क !!!  नगर निगम के सदन की कार्यवाही बुधवार को 11 बजे के बजाय डेढ़ घंटे की देरी से साढ़े 12 बजे शुरू हुई। खबरों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि,इस दौरान 12 मिनट के अंदर सदन में 2 बड़े प्रस्तावों को पास कर दिया। बताया जा रहा है कि,महापौर प्रमिला पांडेय के प्रस्ताव पर पार्षदों ने बिना चर्चा ही विज्ञापन नीति को पास कर दिया। इसके बाद स्ट्रीट लाइट के प्रस्ताव को लेकर भी सदन ने अपनी मुहर लगा दी।

बीते साल से शहर के सभी 110 वार्डों में 10-10 स्ट्रीट लाइट लगाने का प्रस्ताव लटका हुआ था। ये प्रस्ताव भी पास होने के बाद सभी पार्षद अपने-अपने वार्ड में 10-10 स्ट्रीट लाइट लगवा सकेंगे। स्थगित होने के बाद दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई और 8 मिनट में ही सदन पूरी तरह समाप्त हो गया। इसके आगे  बताया जा रहा है किइसके अलावा देश की आजादी में बलिदान देने वाले शहर के सभी 130 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के एक घर को हाउस और सीवर टैक्स से मुक्त कर दिया गया है। वहीं पार्षदों की डेस्क पर लगे सभी माइक बंद होने पर महापौर ने नगर निगम केयर टेकर से सदन में माफी मंगवाई।

स्वरूप नगर में प्रस्तावित शहर की महिला मार्केट को लेकर कांग्रेस के क्षेत्रीय पार्षद कमल शुक्ल बेबी ने हंगामा कर दिया। इसके अलावा अन्य पार्षदों ने अपने-अपने मुद्दों को लेकर हंगामा करना शुरू दिया। हंगामा बढ़ता देख महापौर ने 15 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।सदन की कार्यवाही के दौरान चुन्नीगंज वर्कशॉप की जमीन पर शॉपिंग सेंटर बनाया जाएगा। सदन ने ये जमीन कानपुर स्मार्ट सिटी लि. को हैंडओवर करने की स्वीकृति दे दी। यहां स्किल डेवलपमेंट सेंटर भी प्रस्तावित है।  आपकी जानकारी के लिए बता दें कि,इस प्रस्ताव के पास होने के बाद सदन की कार्यवाही को समाप्त करने की घोषणा कर दी गई। सदन में नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन, अपर नगर आयुक्त अरविंद राय समेत अन्य अधिकारी व पार्षद रहे।

अब शहर में विज्ञापन को लेकर नई नियमावली लागू होगी। दशकों पुरानी विज्ञापन नियमावली में नगर निगम को काफी नुकसान उठना पड़ रहा था। 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद विज्ञापन शुल्क लेना अवैध हो गया। इसके बाद नगर निगम ने अस्थाई तौर पर स्थल किराया के रूप में शुल्क लेना पड़ रहा था। कई बार सदन में विज्ञापन नियमावली रखी गई, लेकिन पास नहीं हो सकी।

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