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Jhunjhunu मिलिए झुंझुनू के 'पीपल बाबा' से, 46 साल से तैयार कर रहे पीपल के पौधे

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राजस्थान न्यूज डेस्क।।   धर्मग्रंथों में पीपल को देववृक्ष की संज्ञा दी गई है। पेरिस में आयोजित जलवायु परिवर्तन महासम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने भी पीपल की महत्ता का जिक्र किया था। कोरोना काल में ऑक्सीजन की अहमियत सबसे मानी। लेकिन ऑक्सीजन का जखीरा माने जाने वाले पीपल को लेकर केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ ही राज्यों के वन महकमे गंभीर नहीं हैं। पीपल पर कोई अहम शोध भी नहीं हो रहा है।वन विभाग के पौधरोपण कार्यक्रमों में भी पीपल वृक्ष सिरे से नदारद है। इतना ही नहीं यदि आम व्यक्ति भी नर्सरियों से पीपल वृक्ष खरीद कर लगाना चाहे तो ज्यादातर नर्सरियों में पीपल वृक्ष नहीं मिल पा रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर पीपल वृक्ष के संरक्षण व उनके संवर्धन को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक वृक्षों में सबसे अधिक पवित्र माना गया है पीपलहिंदू धर्म में पीपल वृक्ष को अन्य वृक्षों की तुलना में बहुत अधिक पवित्र माना गया है पद्म पुराण के अनुसार पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है। इसीलिए पीपल वृक्ष को देव वृक्ष भी कहा गया है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सोमवती अमावस्या को पीपल के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु और लक्ष्मी का वास होता है, ऐसे में सोमवती अमावस्या जैसे धार्मिक पर्वों पर पीपल की पूजा का प्रावधान है।

प्रतिदिन 230 लीटर ऑक्सीजन गैस उत्सर्जित करता है पीपल वैज्ञानिक शोधों में यह बात सामने आई है कि एक पीपल वृक्ष प्रतिदिन औसतन 230 लीटर ऑक्सीजन गैस उत्सर्जित करता है, जिससे सात स्वस्थ लोगों को ऑक्सीजन गैस मिलती है। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों की मानें तो पीपल वृक्ष जिस क्षेत्र में अधिक संख्या में होते हैं वहां का औसत तापमान भी अन्य क्षेत्रों की तुलना में 3 से 4 डिग्री कम होता है। जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलती है। वैज्ञानिक शोधों में यह बात सामने आई है कि पीपल वृक्ष जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड गैस को अवशोषित करने के साथ ही प्राणवायु ऑक्सीजन को उत्सर्जित करता है।

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