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Jabalpur क्रांतिकारी पिता-पुत्र की गिरफ्तारी को जीवंत किया

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देश में स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन को जो बिगुल अंग्रेजों के खिलाफ वर्ष 1857 में बजा उससे जबलपुर भी अछूता नहीं रहा। आजादी की लड़ाई में शहर से वीरांगना रानी दुर्गावती का जीवन गोंडवंश द्वारा दी जाने वाली अंतिम आहूति नहीं थी, गोंडवंश के ही राजा शंकरशाह व उनके पुत्र रघुनाथशाह ने भी 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपने जीवन का बलिदान देकर शहर के इतिहास को गौरवांवित किया है। इतिहासविद डॉ. आनंद सिंह राणा बताते हैं कि शंकरशाह व रघुनाथ शाह को तोप के मुंह से बांध कर उड़ाया गया था। किसी रजवाड़े के सदस्यों को तोप के मुंह से बांध कर उड़ाने की यह देश में पहली घटना थी। राजा शंकरशाह की उम्र उस समय 70 वर्ष के ऊपर थी। दुर्गावती के इस वशंज को गुलामी की जिंदगी से मौत ज्यादा पसंद थी। साथ ही उनके युवा पुत्र रघुनाथशाह में भी शहर के वीर गोंडवंश का खून दौड़ रहा था। स्वतंत्रता की लड़ाई में दोनों का बलिदान आज भी याद किया जाता है।

बलिदान गाथा का जीवंत दृश्यांकन करते हुए 164 वर्षों बाद उनकी बलिदान स्मृति यात्रा भाजपा ने सांसद राकेश सिंह के तत्वाधान में गांधी भवन से बलिदान स्थली तक निकाली गई। यहां बता दें कि जबलपुर के गोंडवाना साम्राज्य के राजा शंकरशाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथशाह देश के पहले राजा थे, जिन्हें अंग्रेजो ने तोप के मुंह में बांधकर उड़ा दिया था। इतिहास के पन्ने में भुला दिए गए पिता-पुत्र के इस बलिदान गाथा और जबलपुर के गौरव को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उनके बलिदान के बाद पहली बार इस तरह का जीवंत दृश्यांकन किया गया।

यह यात्रा गांधी भवन से शुरू हुई सबसे आगे उनकी गिरफ्तारी का जीवंत दृश्यांकन का अभिनय करते हुए राजा शंकरशाह, कुंवर रघुनाथ शाह उनकी धर्मपत्नीयां रानी फुलकुंवर और मन कुंवर को अंग्रेज सैनिक तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ई क्लार्क के नेतृत्व में गिरफ्तार करके ले जाते हुए चल रहे थे। राजा शंकरशाह रघुनाथशाह के सहयोगी रहे बलिदानी क्रांतिकारियो की भेषभूषा में 15 महारथी सूबेदार बलदेव तिवारी, दसनामी महान्तपुरी बाबा, मंहत संग्राम गिरी, शहीद गंगापुरी गोसाईं, राजा हृदय शाह, महारथी मेहरबान सिंह, जवाहर सिंह, गजराज सिंह, रामनिवास चौबे, देवी सिंह, सुदीन दास, कूड़न सिंह, सरजू प्रसाद ठाकुर, महारथी मोनी सिंह भी साथ-साथ चल रहे थे।

यात्रा गांधी भवन, घंटाघर, हाईकोर्ट चौक होते हुए बलिदान स्थली मालगोदाम पहुंची। यहां सांसद राकेश सिंह के साथ सभी जनप्रतिनिधियों और पार्टी के लोगों ने राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। सांसद राकेश सिंह ने बताया कि हम सौभाग्यशाली है कि हमारे जबलपुर में देश के आदिवासी जननायक राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजो से लोहा लिया और अपनी भूमि की रक्षा के लिए समझौता न करते हुए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। 

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