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विधानसभा में तोड़फोड़ मामले में Kerala के शिक्षा मंत्री की याचिका खारिज

विधानसभा में तोड़फोड़ मामले में केरल के शिक्षा मंत्री की याचिका खारिज

केरल न्यूज डेस्क !!! केरल की एक अदालत ने बुधवार को राज्य के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी और एक अन्य विधायक के अलावा चार अन्य पूर्व विधायकों द्वारा 2015 में हुए विधानसभा तोड़फोड़ मामले में आरोपमुक्त करने की याचिका खारिज कर दी है। अदालत इन आरोपियों के खिलाफ 22 नवंबर को आरोप पर सुनवाई करेगी और सभी 6 आरोपियों को उस दिन पेश होने को कहा है।

इस साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में विधानसभा में तोड़फोड़ के लिए अपने नेताओं के खिलाफ मामलों को वापस लेने के लिए केरल सरकार की याचिका को खारिज की थी। उस समय यह पार्टी विपक्ष में थी। वहीं, अब कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष मांग कर रहा है कि जल्द से जल्द वह पद छोड़ दें।

शीर्ष अदालत ने तब फैसला सुनाया था कि सभी आरोपियों को मुकदमे का सामना करना पड़ेगा और अब यहां की अदालत ने भी उनकी आरोपमुक्त करने की याचिका को खारिज कर दी है।

लेकिन, अब सत्र में विधानसभा के साथ, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष अब नए विकास पर कैसे जवाब देगा, इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।

यह तोड़फोड़ 13 मार्च 2015 को हुई थी, जब तत्कालीन राज्य के वित्त मंत्री के.एम. मणि नए वित्तीय वर्ष के लिए राज्य का बजट पेश कर रहे थे।

तत्कालीन माकपा के नेतृत्व वाले विपक्ष ने कड़ा रूख अपनाया था कि बंद बार को फिर से खोलने के लिए एक बार मालिक से एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में मणि को बजट पेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

जब मणि ने अपना भाषण शुरू किया, तो वामपंथी विधायकों ने स्पीकर की कुर्सी को मंच से बाहर फेंक दिया और उनकी मेज पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया।

घटना के बाद तत्कालीन स्पीकर एन. सक्थान ने क्राइम ब्रांच से जांच की मांग की थी।

अन्य आरोपियों की सूची में राज्य के पूर्व मंत्री ई.पी. जयराजन भी शामिल हैं।

अन्य में के. कुंजू अहमद, सी.के. सदाशिवन और के. अजित, (जो अब विधायक नहीं हैं), जबकि के.टी.जलील पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री अब विधायक हैं।

कहानी में ट्विस्ट यह है कि 2020 के बाद से दिवंगत के.एम. मणि की पार्टी - केरल कांग्रेस (एम), अब उनके बेटे जोस के मणि के नेतृत्व में, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ से बाहर हो गई है और वर्तमान में विजयन सरकार की तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी है और उसे कैबिनेट बर्थ दिया गया है।

--आईएएनएस

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