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पूछताछ में बड़ा खुलासा! फ्लैट में नमक के घोल से तैयार किए जा रहे थे विस्फोटक पदार्थ, रिसर्च के दौरान सीखी थी तकनीक

पूछताछ में बड़ा खुलासा! फ्लैट में नमक के घोल से तैयार किए जा रहे थे विस्फोटक पदार्थ, रिसर्च के दौरान सीखी थी तकनीक

जांच एजेंसियों की पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। आरोपियों के अनुसार, उमर के फ्लैट में सामान्य नमक के घोल का इस्तेमाल कर क्लोरेट और परक्लोरेट जैसे विस्फोटक पदार्थ तैयार किए जा रहे थे। इसके लिए इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया अपनाई गई थी। जांच में सामने आया है कि यह तकनीक उमर ने अपनी रिसर्च के दौरान सीखी थी।

सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि फ्लैट के भीतर एक अस्थायी सेटअप तैयार किया गया था, जहां रासायनिक प्रक्रिया के जरिए विस्फोटक तत्व बनाने का प्रयास किया जा रहा था। इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक के माध्यम से नमक के घोल से रासायनिक परिवर्तन कर ऐसे पदार्थ तैयार किए जाते थे, जिनका इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री में किया जा सकता है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि क्लोरेट और परक्लोरेट दोनों ही अत्यधिक संवेदनशील रासायनिक पदार्थ माने जाते हैं। इनका उपयोग औद्योगिक और वैज्ञानिक कार्यों में भी होता है, लेकिन गलत हाथों में पड़ने पर ये गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि उमर को रसायन विज्ञान और तकनीकी प्रक्रियाओं की अच्छी जानकारी थी। बताया जा रहा है कि उसने रिसर्च और प्रयोगों के दौरान इलेक्ट्रोलिसिस की यह विधि सीखी थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन पदार्थों को तैयार करने के पीछे असली उद्देश्य क्या था और क्या इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं।

जांच अधिकारियों ने फ्लैट से बरामद रासायनिक सामग्री, उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। विशेषज्ञ अब यह जांच कर रहे हैं कि वहां तैयार किए गए पदार्थों की मात्रा कितनी थी और वे कितने खतरनाक हो सकते थे।

इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी और वैज्ञानिक ज्ञान का गलत इस्तेमाल समाज के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसलिए मामले की हर पहलू से गहन जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रोलिसिस एक सामान्य वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग शिक्षा और उद्योगों में किया जाता है। लेकिन यदि इसका इस्तेमाल विस्फोटक या खतरनाक पदार्थ बनाने के लिए किया जाए तो यह कानून और सुरक्षा दोनों के लिहाज से गंभीर मामला बन जाता है।

फिलहाल जांच एजेंसियां आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही हैं और उनके संपर्कों की भी जांच की जा रही है। मामले में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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