×

Bhagalpur घर में प्रसव कराने के दौरान बिगड़ी तबीयत, रातभर करते रहे घरेलू उपचार, सुबह अस्पताल पहुंचने तक हुई मौत

बांका जिला के रजौन गांव में बेटे की चाहत व घर में प्रसव कराने की लापरवाही के कारण प्रसूता की मौत हो गई। रजौन निवासी भुजंगी महतो 5 बेटियों के पिता थे। लेकिन, एक बेटे की चाहत में उन्हें एक बार फिर बेटी ही हुई। लेकिन, प्रसव के दौरान लापरवाही के कारण पत्नी बुधो देवी की मौत हो गई। इस संबंध में डॉ. हेमशंकर शर्मा ने कहा कि घर में प्रसव करना बहुत ही खतरनाक है। इसी लापरवाही में प्रसूता की जान गई है। हालांकि, आशा की भी इसमें गलती है। क्योंकि, आशा को ये ध्यान रखना है कि क्षेत्र में कितनी प्रसूता हैं और उन्हें स्वास्थ्य केंद्र में जाने के लिए प्रेरित करना भी उनका ही काम है।  तबीयत बिगड़ी तब अस्पताल लेकर गए  भुजंगी महतो ने बताया कि पत्नी बुधो देवी बुधवार को व्रत में थीं। रात के ढाई बजे को अचानक प्रसव पीड़ा हुई। हालांकि, इस दौरान उसने एक बच्ची को जन्म दिया। लेकिन, उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। सुबह होने तक घरेलू उपचार ही किया गया। लेकिन, सुधार नहीं होने पर परिजन निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उसे मायागंज अस्पताल ले जाने की सलाह दी। आनन-फानन में भुजंगी महतो अपनी पत्नी को मायागंज अस्पताल ले आए। जहां डॉक्टरों ने बुधो देवी को मृत घोषित कर दिया।  बेटे की चाह में बन गए 6 बेटियों के पिता  भुजंगी महतो ने बताया कि इस बार भी उन्हें लड़की ही हुई है। उन्हें बेटे का सुख नहीं मिल पाया। बेटे की चाह में उन्हें 6 बेटियां हो गईं। उन्होंने बताया कि उनकी 6 बेटियों में नैना(17), रजनी(8), सजनी(6), कविता(5), माया(2), और नवजात शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बेटे की चाह में ही पत्नी की जान चली गई।  लोगों में जागरूकता की कमी : डॉ. हेमशंकर  वहीं, एक्सपर्ट डॉ. हेमशंकर शर्मा ने बताया कि इसमें दो बातें हैं। महिला जिस गांव से आती हैं उस गांव की आशा की जिम्मेदारी है कि वो एएनटी जांच कराएं। साथ ही ये देखना होगा कि उन्होंने फॉलो किया या नहीं। यदि फॉलो किया तो उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए कन्विंस किया या नहीं किया। यदि किसी डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर और आशा दोनों ने मिलकर उन्हें घर में प्रसव नहीं कराने के लिए प्रेरित किया या नहीं। घर में डेलिवरी कराने में खतरा है इसलिए घर में डेलिवरी नहीं करना चाहिए।  उन्होंने बताया कि ज्यादातर खतरा ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पूरा करने पर होता है। इस मामले में बात बिगड़ने पर वहां कोई प्रशिक्षित जीएनएम या एएनएम नहीं होती है जो उनको बचा लेगी। इस तरह यह मामला सुरक्षित मातृत्व प्रसव से बिल्कुल उल्टा देखा जा सकता है। आज के समय में इसका आकलन सही होना चाहिए। किसी भी गांव में जितनी भी महिलाएं गर्भवती हैं उनका सारा डेटा आशा के पास हाेना चाहिए।


बिहार  न्यूज़ डेस्क !!! दोस्तो, आज भी हमारे कई गांव ऐसे है जहां पर प्रसव के समय महिला को अस्पताल नहीं ले जाया जाता है बल्बि घर पर ही रखकर प्रसव करवाया जाता है जिससे कई बार महिलाओं की मौत भी हो जाती हैं कुछ ऐसा ही मामला आज हम आपको बताने जा रहे हैं । बताया जा रहा है कि,  बांका जिला के रजौन गांव में बेटे की चाहत व घर में प्रसव कराने की लापरवाही के कारण प्रसूता की मौत हो गई । बता दें कि, रजौन निवासी भुजंगी महतो 5 बेटियों के पिता थे मगर बेटे की चाहत में उन्हें एक बार फिर बेटी ही हुई मगर प्रसव के दौरान लापरवाही बरतने के कारण उसकी पतनी की मौत हो गई । इस संबंध में डॉ. हेमशंकर शर्मा ने कहा कि घर में प्रसव करना बहुत ही खतरनाक है। इसी लापरवाही में प्रसूता की जान गई है ।

हालांकि, इस मामले में आशा की भी इसमें गलती है क्योंकि, आशा को ये ध्यान रखना है कि क्षेत्र में कितनी प्रसूता हैं और उन्हें स्वास्थ्य केंद्र में जाने के लिए प्रेरित करना भी होता हैं । इस मामले के बारे में जंगी महतो ने बताया कि पत्नी बुधो देवी बुधवार को व्रत में थीं और रात के ढाई बजे को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई जिसके बाद उसने एक बच्ची को जन्म दिया मगर उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और दूसरे दिन सुबह होने तक घरेलू उपचार ही किया गया जिसके कारण उसकी मौत हो गई ।

भागलपुर न्यूज डेस्क !!!

Share this story