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पृथ्वी के सूरज' के शक्तिशाली चुंबक का काम पूरा, अकेले ही विमानवाहक पोत को उठाने की रखता है क्षमता

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मनुष्य ने बिजली के उत्पादन के लिए कई स्रोत बनाए हैं, लेकिन उनमें से प्रत्येक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल्द ही एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत तैयार नहीं किया गया, तो मनुष्यों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस मुद्दे को ध्यान में रखते हुए, कई देश एक स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन मशीन बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं जो भविष्य की तस्वीर बदल देगी। इसे 'पृथ्वी पर सूर्य' भी कहा जाता है।पिछले 10 सालों से वैज्ञानिक एक खास तरह का चुंबक बनाने पर काम कर रहे हैं, जो कि विशालकाय मशीन इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) का हिस्सा है।

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गुरुवार को वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी मिली, जहां विशालकाय चुंबक के पहले हिस्से की डिलीवरी की गई। इसकी क्षमता इतनी अधिक है कि यह एक अमेरिकी विमानवाहक पोत को भी आसानी से उठा सकती है। चुंबक 60 फीट लंबा और 14 फीट चौड़ा है। जिसे प्रोजेक्ट में शामिल 35 देशों ने तैयार किया है। रिएक्टर 2026 तक काम करना शुरू कर देगाअपनी शक्ति की दृष्टि से यह हाइड्रोजन प्लाज्मा को 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक गर्म कर सकता है, जो सूर्य के आंतरिक भाग से 10 गुना अधिक गर्म होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मशीन के संचालन से न तो ग्रीनहाउस गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, मीथेन, आदि) का उत्सर्जन होगा और न ही यह रेडियोधर्मी अपशिष्ट उत्पन्न करेगा। जो काफी हद तक प्रदूषण को कम कर स्वच्छ ऊर्जा का निर्माण करेगा। इन सभी विशेषताओं को देखते हुए इसे पृथ्वी का सूर्य कहा जा रहा है।

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