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शिमला समर फेस्टिवल: 320 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दिया महिला सशक्तीकरण और नशामुक्ति का संदेश

शिमला, 9 जून (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल के दूसरे दिन ऐतिहासिक मॉल रोड पर आयोजित महानटी कार्यक्रम ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी 320 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला सशक्तीकरण, सामाजिक जागरूकता और नशामुक्त समाज का संदेश दिया।
शिमला समर फेस्टिवल: 320 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दिया महिला सशक्तीकरण और नशामुक्ति का संदेश

शिमला, 9 जून (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल के दूसरे दिन ऐतिहासिक मॉल रोड पर आयोजित महानटी कार्यक्रम ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी 320 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला सशक्तीकरण, सामाजिक जागरूकता और नशामुक्त समाज का संदेश दिया।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष महानटी को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए 'मां - मदर्स अगेंस्ट एब्यूज' और 'मदर्स अगेंस्ट एडिक्शन' थीम पर आधारित किया गया था।

कार्यक्रम का बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने आनंद उठाया। पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागी महिलाओं ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। इस अवसर पर उपायुक्त ने उपस्थित सभी महिलाओं को नशे के खिलाफ शपथ दिलाई और समाज से नशे जैसी गंभीर समस्या को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।

महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल शर्मा ने बताया कि शिमला समर फेस्टिवल में हर वर्ष आंगनबाड़ी कार्यकर्ता महानटी में भाग लेती हैं, लेकिन इस बार कार्यक्रम को विशेष सामाजिक संदेशों से जोड़ा गया है। महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, भेदभाव, असमानता और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने तथा महिलाओं को अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। समाज में महिलाओं की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन की सबसे महत्वपूर्ण वाहक भी हैं।

ममता पॉल शर्मा ने बताया कि महानटी का दूसरा प्रमुख विषय 'मदर्स अगेंस्ट एडिक्शन' रहा, जिसके माध्यम से प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया। युवाओं का नशे की गिरफ्त में आना समाज के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में माताओं और महिलाओं की जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने युवाओं को नशे से दूर रखने, परिवारों को जागरूक करने और समाज में नशामुक्ति अभियान को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

उन्होंने कहा कि जब महिलाएं किसी सामाजिक बदलाव के लिए आगे आती हैं तो उसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। महिलाओं की भागीदारी से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की संभावनाएं और अधिक मजबूत होती हैं। इसी सोच के साथ इस बार कार्यक्रम को केवल सांस्कृतिक न बनाकर सामाजिक जागरूकता का मंच भी बनाया गया।

कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं ने हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक वेशभूषा रेश्टा और धाटू पहनकर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी जीवंत किया। पारंपरिक लोक संगीत और नृत्य के साथ प्रस्तुत कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

ममता पॉल शर्मा ने बताया कि इस आयोजन में करीब 320 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और महिला सशक्तीकरण, नशामुक्ति तथा सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर मजबूत संदेश दिया।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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